इज़राइली रक्षा बलों (IDF) ने आखिरकार 5 साल की हिंड राजाब की मौत के मामले में अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार कर ली है। यह घटना जनवरी 2024 की है, जिसके बारे में सेना दो साल से इनकार करती आ रही थी। अब इस मामले में एक औपचारिक आपराधिक जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें दो पैरामेडिक्स की भी जान चली गई थी। इस कबूलनामे से जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी पूछताछ शुरू हो गई है।
क्या हुआ था उस दिन?
IDF ने 19 अगस्त 2026 को यह आधिकारिक बयान जारी किया कि उनकी सेनाओं ने जनवरी 2024 में 5 साल की हिंड राजाब के परिवार की गाड़ी पर गोलियां चलाई थीं। इतना ही नहीं, हिंड को बचाने के लिए भेजी गई फिलिस्तीनी रेड क्रिस सोसाइटी की एम्बुलेंस पर भी गोलीबारी की गई, जिसमें दो पैरामेडिक्स की भी मौत हो गई।
933 दिनों का इनकार और अब जांच
सेना के यह स्वीकार करने से पहले, लगभग 933 दिनों तक इस घटना पर इनकार किया जाता रहा। इस कबूलनामे के बाद, IDF ने मामले को मिलिट्री क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिविजन को सौंप दिया है, जिसने अब एक औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह मामला युद्ध अपराधों से जुड़ी पांच हाई-प्रोफाइल जांचों में से एक है, हालांकि इनमें से ज़्यादातर मामलों को बिना किसी आपराधिक कार्रवाई के बंद कर दिया गया था। इस बात की मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी आलोचना की है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और संस्थागत जवाबदेही के नज़रिए से, यह घटना सेना की आंतरिक न्याय प्रणाली पर गहरे संदेह को उजागर करती है। ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स की रिपोर्ट्स बताती हैं कि फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत से जुड़े ऐसे मामलों में सज़ा मिलने की दर बहुत कम है। 'Yesh Din' जैसे संगठनों ने यह भी बताया है कि सेना के खिलाफ की गई बहुत कम शिकायतों पर आपराधिक आरोप तय होते हैं, जिसे आलोचक आत्म-जांच तंत्र की प्रभावशीलता को कमज़ोर करने वाला बताते हैं।
आगे क्या?
हिंड राजाब फाउंडेशन जैसी अंतरराष्ट्रीय कानूनी संस्थाएं अब इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के ज़रिए जवाबदेही की मांग कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के लिए, ये घटनाक्रम भू-राजनीतिक स्थिरता और शासन मानकों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसी आशंका बनी हुई है कि जिन संस्थाओं पर इन ऑपरेशन्स से जुड़ने का आरोप है, उनके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
अब सभी की निगाहें इस नई आपराधिक जांच की पारदर्शिता और गति पर टिकी हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और पीड़ित परिवार यह देखेंगे कि क्या यह जांच वास्तविक अभियोजन की ओर ले जाती है, या अतीत की तरह ही बिना किसी आपराधिक जवाबदेही के बंद हो जाती है।
