सऊदी अरब के King Khalid International Airport पर हुए घातक मिसाइल और ड्रोन हमले ने ग्लोबल मार्केट की चिंता बढ़ा दी है। इस हमले के बाद एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द कर दी हैं और एनर्जी सप्लाई चेन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
हमले की गंभीरता और मौजूदा हालात
10 अक्टूबर, 2026 को रियाद के King Khalid International Airport पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमले ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। इस दुखद घटना में 12 लोगों की मौत हुई है और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए एयरपोर्ट पर सभी ऑपरेशन्स रोक दिए गए हैं और अधिकारी सुरक्षा आकलन कर रहे हैं। Houthi गुट ने चेतावनी दी है कि मक्का और मदीना को छोड़कर सऊदी के अन्य सभी एयरपोर्ट अब उनके सैन्य निशाने पर हैं।
एविएशन सेक्टर पर दबाव
इस हमले का सीधा असर एयरलाइंस पर पड़ा है। Air India, Lufthansa Group और Pakistan International Airlines जैसी प्रमुख कंपनियों ने रियाद के लिए अपनी उड़ानों को या तो निलंबित कर दिया है या उनमें बदलाव किया है। गल्फ सेक्टर भारत के लिए बिजनेस और लेबर ट्रैवल का एक अहम रूट है, ऐसे में उड़ानों का रद्द होना एविएशन कंपनियों के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ा सकता है और पैसेंजर ट्रैफिक में भारी गिरावट ला सकता है।
क्रूड ऑयल और भारत पर असर
सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल प्रोड्यूसर है। ऐसी घटनाओं से क्रूड ऑयल की कीमतों में 'सिक्योरिटी प्रीमियम' जुड़ जाता है, जिससे दाम बढ़ने की आशंका है। अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल और महंगाई दर पर पड़ेगा। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने कहा है कि WPC Energy Congress अपने तय समय पर होगी, लेकिन बाजार किसी भी तरह के तनाव के प्रति बहुत संवेदनशील बना रहेगा।
सऊदी की 'Vision 2030' पर सवाल
यह हमला सऊदी अरब के 'Vision 2030' के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसका लक्ष्य देश को ग्लोबल टूरिज्म और बिजनेस हब बनाना है। इस तरह के लगातार खतरे विदेशी निवेशकों के भरोसे को डिगा सकते हैं। वहीं, अमेरिका की ओर से जवाबी कार्रवाई के संकेतों ने जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता को और गहरा कर दिया है। निवेशकों को अब क्रूड ऑयल की कीमतों, सरकारी बयानों और एयरपोर्ट के ऑपरेशन्स पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
