यमन के हुथी समूह ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 'ट्रांजिट फीस' लगाने की योजना बनाई है। इस कदम से वैश्विक शिपिंग लागत बढ़ सकती है और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। खास बात यह है कि चीनी जहाजों को इससे छूट मिल सकती है।
लाल सागर में शिपिंग पर नए नियम!
यमन में सक्रिय हुथी समूह दक्षिणी लाल सागर में व्यावसायिक जहाजों के लिए टोल सिस्टम लागू करने पर विचार कर रहा है। यह इलाका बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य का हिस्सा है, जो ऊर्जा निर्यात और वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। हालांकि, इस नई नीति की समय-सीमा की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार, हुथी समूह इस संग्रह के लिए नियामक ढांचा स्थापित करने हेतु ईरानी सलाहकारों के साथ काम कर रहा है।
वैश्विक व्यापार पर गहरा असर
यह प्रस्तावित कदम ऐसे समय में आया है जब नवंबर 2023 से लाल सागर में शिपिंग गतिविधियों में भारी व्यवधान देखा जा रहा है। यदि यह नई नीति लागू होती है, तो वैश्विक शिपिंग कंपनियों के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। वर्तमान में, सुरक्षा जोखिमों के कारण लाल सागर से बचने वाले जहाज केप ऑफ गुड होप के चक्कर लगाकर यात्रा कर रहे हैं। इस मार्ग परिवर्तन से यात्रा का समय लगभग 16 दिनों से बढ़कर 50 दिनों तक हो जाता है, जिससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत में काफी वृद्धि होती है।
संभावित छूट और क्षेत्रीय प्रभाव
खबरों के मुताबिक, चीनी जहाजों को इन शुल्कों से छूट मिल सकती है। यह बीजिंग और हुथी नेतृत्व के बीच टैंकरों के सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करने के लिए चल रही बातचीत का हिस्सा हो सकता है। अन्य अंतरराष्ट्रीय शिपर्स के लिए स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हुथी द्वारा लगाए गए टोल के विचार का औपचारिक रूप से विरोध किया है, लेकिन इसे रोकने की उनकी क्षमता सीमित है। क्षेत्र में गश्त कर रहे अंतर्राष्ट्रीय नौसैनिक बल भी दबाव में बताए जा रहे हैं।
ऊर्जा बाजारों के लिए आर्थिक जोखिम
वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण कड़ी है। किसी भी प्रकार का प्रतिबंध या अनधिकृत शुल्क एकत्र करने का प्रयास सीधे तौर पर सऊदी अरब के ऊर्जा निर्यात के लिए खतरा पैदा करेगा। हुथी समूह पर पहले भी शिपिंग एजेंसियों से पैसे वसूलने के आरोप लगते रहे हैं, जिससे उन्हें हर महीने लाखों डॉलर का राजस्व मिलने का अनुमान है। निवेशकों को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि क्या इन घटनाक्रमों से जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम (War Risk Insurance Premiums) में वृद्धि होती है या वैश्विक माल ढुलाई दरों (Global Freight Rates) में और बढ़ोतरी होती है, जिसका असर महंगाई और वैश्विक व्यापार पर निर्भर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।
