US और Iran के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पूर्व विदेश मंत्री Hillary Clinton ने भारत और चीन को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इस बीच US Treasury ने 'Operation Economic Outcast' शुरू कर कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल तेज हो गई है।
पूर्व विदेश मंत्री Hillary Clinton का मानना है कि भारत और चीन अपनी एनर्जी ट्रेड का इस्तेमाल कर Iran के साथ चल रहे तनाव को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उनका तर्क है कि इन देशों का ईरान पर आर्थिक दबदबा है, जो उसे Hormuz के जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और बातचीत की मेज पर वापस लाने के लिए मजबूर कर सकता है।
कड़े प्रतिबंधों का दौर
US सरकार ने कूटनीतिक दबाव के साथ ही आर्थिक शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। Treasury Secretary Scott Bessent ने 'Operation Economic Outcast' का ऐलान किया है। इस प्रोग्राम के तहत शिपिंग, एविएशन, गोल्ड और क्रिप्टोकरेंसी जैसे 5 बड़े सेक्टरों को निशाना बनाया गया है। US ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी देश या कंपनी ईरान के साथ बिजनेस जारी रखेगी, उसे 'सेकेंडरी सैंक्शंस' यानी भारी दंड का सामना करना पड़ सकता है।
ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर खतरा
दुनियाभर की 20% तेल आपूर्ति Hormuz के रास्ते होती है, और मौजूदा तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का डर बना हुआ है। निवेशकों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा सीधे तौर पर महंगाई और ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित करेगी।
भारत के लिए चुनौती
भारत के लिए यह एक 'बैलेंसिंग एक्ट' जैसा है। एक तरफ एनर्जी की जरूरतें हैं, तो दूसरी तरफ US के नए प्रतिबंधों का रिस्क। यदि US के नए गाइडलाइंस के तहत भारत पर दबाव बढ़ता है, तो इससे ट्रेड रिश्तों और इंपोर्ट कॉस्ट पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे फिस्कल स्टेबिलिटी प्रभावित होने का खतरा बना रहेगा।
