सरकार निर्यातकों के साथ, हरसंभव मदद का भरोसा
केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने साफ किया है कि सरकार 'हर पॉलिसी टूल और एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन' का इस्तेमाल करेगी ताकि पश्चिमी एशिया में बढ़ते संकट से जूझ रहे निर्यातकों की मदद की जा सके। यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक व्यापार मार्गों में बड़ी रुकावटें आ रही हैं।
लॉजिस्टिक्स की बढ़ी मुश्किलें, मंडराया खतरा
निर्यातों की मानें तो उन्हें इस वक्त भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फ्रेट रेट्स (shipping rates) आसमान छू रहे हैं, डिमरेज चार्जेस (demurrage charges) में बढ़ोतरी हुई है, शिपिंग रूट्स (shipping routes) काफी लंबे हो गए हैं और कंटेनरों (containers) की कमी हो गई है। यह सब मौजूदा संघर्षों के कारण हो रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स की लागत (logistics costs) और सप्लाई चेन (supply chain) की विश्वसनीयता पर भारी दबाव पड़ा है।
सरकार की तुरंत कार्रवाई, बातचीत जारी
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने एक खास हेल्प डेस्क (help desk) और एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप (inter-ministerial group) बनाया है, जो निर्यातकों से हर दिन फीडबैक ले रहा है और स्थिति का जायजा ले रहा है। मंत्री Goyal ने बताया कि कॉमर्स मिनिस्ट्री, मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग (Ministry of Shipping) और अलग-अलग शिपिंग कंपनियों के साथ लगातार बातचीत कर रही है। इसका मकसद तात्कालिक चिंताओं का समाधान खोजना है, खासकर उन कार्गो जहाजों के मामले में जो फिलहाल फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में फंसे हुए हैं। Goyal ने उम्मीद जताई कि लॉजिस्टिक्स से जुड़ी इन रुकावटों का जल्द ही समाधान निकल आएगा।
भारत की साख बरकरार, बढ़ा-घटा व्यापार
इन मौजूदा अस्थिरताओं के बावजूद, भारत अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए दृढ़ है। Goyal ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है, और उसने कोविड-19 महामारी (Covid-19 pandemic) के मुश्किल दौर में भी अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया था। इस विश्वसनीयता ने भारत को एक भरोसेमंद साझेदार (trusted partner) के रूप में स्थापित किया है, और सरकार इस दर्जे को बनाए रखना चाहती है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2025 में पश्चिम एशियाई देशों से करीब 157 अरब डॉलर का आयात (import) किया था, जबकि इन अर्थव्यवस्थाओं को अपना निर्यात (export) लगभग 67 अरब डॉलर रहा।