US Federal Reserve के पॉलिसी फैसले से पहले ग्लोबल मार्केट में मजबूती देखी जा रही है। बाजार को उम्मीद है कि आज **0.25%** की ब्याज दर बढ़ोतरी हो सकती है, जो जुलाई 2023 के बाद पहली बार होगी।
दुनियाभर के इक्विटी बाजारों ने आज, 16 सितंबर 2026, सकारात्मक रुख के साथ कारोबार की शुरुआत की है। पिछले दो सत्रों की गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी दिख रही है। सभी की निगाहें US Federal Reserve के पॉलिसी फैसले पर टिकी हैं, जो आज 2:00 PM ET (भारतीय समयानुसार रात) पर आने वाला है। अनुमान है कि ब्याज दरें 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 3.75%-4.00% के दायरे में आ जाएंगी।
निवेशक क्यों हैं सतर्क?
ब्याज दर बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन असली खेल फेड चेयर Kevin Warsh की कमेंट्री पर निर्भर करेगा। अगर फेड यह संकेत देता है कि महंगाई से लड़ने के लिए दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी, तो ग्लोबल बाजारों में बड़ी गिरावट आ सकती है। इसके विपरीत, यदि रुख थोड़ा नरम होता है, तो निवेशकों को राहत मिल सकती है।
भारतीय बाजार पर असर
भारतीय निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम काफी अहम है। जब अमेरिका में दरें बढ़ती हैं, तो US बॉन्ड यील्ड आकर्षक हो जाती है, जिससे FIIs का पैसा उभरते बाजारों से निकलकर अमेरिकी एसेट्स की ओर चला जाता है। इसके अलावा, डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव पड़ता है, जिसका असर उन कंपनियों पर सीधा पड़ता है जो आयात (import) ज्यादा करती हैं या जिन पर विदेशी कर्ज (foreign debt) ज्यादा है।
क्रूड और बॉन्ड का हाल
राहत की बात यह है कि सऊदी अरब द्वारा सप्लाई बढ़ाने की खबरों के बाद Brent crude की कीमतें 2.4% गिरकर $106 प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं। साथ ही, बॉन्ड यील्ड्स में आई मामूली नरमी ने टेक्नोलॉजी और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स को सहारा दिया है। हालांकि, स्टिकी महंगाई और बढ़ती उधारी लागत अभी भी कॉरपोरेट मुनाफे के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
