Germany vs China: चीनी टेक पर जर्मनी की कड़ी चेतावनी, ग्लोबल सप्लाई चेन में आ सकता है बड़ा बदलाव

INTERNATIONAL-NEWS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Germany vs China: चीनी टेक पर जर्मनी की कड़ी चेतावनी, ग्लोबल सप्लाई चेन में आ सकता है बड़ा बदलाव

जर्मनी की खुफिया एजेंसी BfV ने चीनी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर चेतावनी जारी की है। डेटा चोरी और सिस्टम को रिमोट से बंद करने के खतरों के बीच, जर्मनी अब अपनी महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं (Critical Infrastructure) को सुरक्षित करने के लिए सख्त रुख अपना रहा है।

जर्मनी की डोमेस्टिक इंटेलिजेंस एजेंसी, BfV ने देश की चीनी टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है। संसदीय समिति के सामने एजेंसी के प्रमुख, सिनान सेलेन ने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा निर्भरता देश की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है।

सुरक्षा के गंभीर खतरे

खुफिया रिपोर्ट सिर्फ साइबर हमलों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों को डर है कि चीनी हार्डवेयर का उपयोग डेटा हार्वेस्टिंग और सबसे खतरनाक—रिमोट शटडाउन के लिए किया जा सकता है। इससे तनाव के समय महत्वपूर्ण औद्योगिक सिस्टम को पैरालाइज किया जा सकता है।

जर्मनी की नई रणनीति

साल 2023 से जर्मनी ने चीन को एक 'सिस्टमिक राइवल' माना है। अब बर्लिन अपनी 5G नेटवर्क से चीनी कंपोनेंट्स को हटाने की प्रक्रिया में है और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी निवेश की कड़ी जांच कर रहा है।

निवेश और बाजार पर असर

जर्मनी सरकार अक्टूबर 2026 के मध्य तक एक नया आर्थिक-सुरक्षा पैकेज पेश करने की तैयारी में है। अगर यह कानून बनता है, तो भविष्य में सख्त स्क्रीनिंग और नए टैरिफ्स देखने को मिल सकते हैं।

निवेशकों के लिए इसका मतलब सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है। भारत का ऑटो-कंपोनेंट और इंजीनियरिंग सेक्टर जर्मनी के साथ गहराई से जुड़ा है। यदि जर्मन कंपनियां चीनी पार्ट्स को हटाकर वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख करती हैं, तो यह भारतीय निर्माताओं के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है। हालांकि, इस बदलाव के दौरान कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जिसे लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.