Green Climate Fund की घेराबंदी: नेपाल फ्लड प्रोजेक्ट में **7 साल** की देरी पर उठे सवाल

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AuthorAditya Rao|Published at:
Green Climate Fund की घेराबंदी: नेपाल फ्लड प्रोजेक्ट में **7 साल** की देरी पर उठे सवाल

Green Climate Fund (GCF) के एक **$49.9 मिलियन** के प्रोजेक्ट में **7 साल** की लंबी देरी ने अंतरराष्ट्रीय क्लाइमेट फाइनेंसिंग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेपाल में अगस्त **2026** की विनाशकारी बाढ़ के बाद इस देरी की आलोचना तेज हो गई है।

प्रोजेक्ट में देरी और चुनौतियां

Green Climate Fund (GCF) अब तीखी आलोचनाओं के घेरे में है। नेपाल में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFs) से बचाव के लिए $49.9 मिलियन का जो प्रोजेक्ट प्रस्तावित था, उसे मंजूरी मिलने में 2018 से 2025 तक का लंबा समय लग गया। हैरानी की बात यह है कि इसका काम मार्च 2026 में ही शुरू हो पाया था।

क्यों भारी पड़ी ये देरी?

प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य अर्ली वार्निंग सिस्टम और डिजास्टर रिस्क रिडक्शन था, जो अगस्त 2026 में भोटकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में आई विनाशकारी बाढ़ के समय सक्रिय नहीं थे। इस देरी ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या ग्लोबल क्लाइमेट फाइनेंसिंग के ढांचे में इतनी खामियां हैं कि समय पर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बन पा रहा है।

आगे की राह

हालांकि GCF ने हाल ही में $4 बिलियन के नए क्लाइमेट इन्वेस्टमेंट का ऐलान किया है, लेकिन नेपाल की स्थिति ने फंड के डिप्लॉयमेंट (Deployment) पर पारदर्शिता की मांग को तेज कर दिया है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले और कृषि मंत्री गीता चौधरी की ओर से आई अपीलों के बाद, Fund for Responding to Loss and Damage (FRLD) ने इस संकट पर चर्चा करने के लिए एक इमरजेंसी सेशन बुलाया है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस आपात स्थिति में नेपाल को कितनी तेजी से मदद पहुंचाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.