उभरते बाजारों से बड़ी पूंजी निकासी! AI और कमोडिटी का जोश ठंडा, निवेशक चिंतित

INTERNATIONAL-NEWS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
उभरते बाजारों से बड़ी पूंजी निकासी! AI और कमोडिटी का जोश ठंडा, निवेशक चिंतित
Overview

उभरते बाजारों (Emerging Markets) से बड़ी मात्रा में पूंजी बाहर जा रही है। वजह है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कमोडिटी (Commodity) में निवेश को लेकर निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ना। खासकर चीन पर फोकस वाले फंड्स से भारी निकासी हुई है, जो अप्रैल **2026** से अब तक **$79 बिलियन** से अधिक है। यह ट्रेंड निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमी का संकेत है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

उभरते बाजारों पर छाई चिंता की लहर

हाल के दिनों में उभरते बाजारों से पूंजी का जिस तरह से पलायन हो रहा है, वह किसी साधारण तिमाही गिरावट से कहीं ज्यादा बड़ी बात है। अप्रैल 2025 में शुरू हुआ AI और कमोडिटी में निवेश का जोश अब ठंडा पड़ चुका है, जिसके कारण फंड्स से भारी मात्रा में पैसा निकाला जा रहा है। निवेशक अब अपने जोखिम लेने की क्षमता का फिर से आकलन कर रहे हैं और उन रणनीतियों पर फिर से विचार कर रहे हैं जिनमें स्थिरता से ज्यादा ग्रोथ को प्राथमिकता दी गई थी।

AI और कमोडिटी का फीका पड़ता जोर

उभरते बाजारों से $8 बिलियन की पूंजी पिछले हफ्ते ही बाहर निकली है, जबकि उससे एक हफ्ते पहले यह आंकड़ा $24.4 बिलियन था। यह पैसा मुख्य रूप से लॉन्ग-ओनली (Long-only) निवेश रणनीतियों से निकाला जा रहा है, हालांकि एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में कुछ स्थिरता देखी गई है। इन निकासी की मुख्य वजह AI और कमोडिटी वाले थीम का दम तोड़ना माना जा रहा है, जिन्होंने पहले निवेशकों को आकर्षित किया था। अकेले चीन पर केंद्रित डोमेस्टिक फंड्स से अप्रैल 2026 के बाद से करीब $79 बिलियन निकाले जा चुके हैं। दुनिया भर में, EM फंड्स लगातार तीन हफ्तों से निकासी देख रहे हैं, जिसकी कुल राशि $738 मिलियन है।

ऐतिहासिक रूप से, EM एसेट्स ग्लोबल रिस्क एपेटाइट (Global Risk Appetite) में बदलाव के प्रति संवेदनशील रहे हैं। मौजूदा सेंटीमेंट (Sentiment) बताता है कि निवेशक AI के हाइप (Hype) से दूर जा रहे हैं, जो काफी हद तक अमेरिका और चीन की इनोवेशन (Innovation) से प्रेरित है, और अधिक स्थिर एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं। कमोडिटी साइकिल (Commodity Cycle) भी कंसोलिडेट (Consolidate) होता दिख रहा है, जिसमें प्रीशियस मेटल (Precious Metal) और कमोडिटी इक्विटी फंड्स (Commodity Equity Funds) में बड़ी गिरावट आई है। प्रीशियस मेटल फ्लोज़ (Precious Metal Flows) पिछले दो सालों में पहली बार निगेटिव हुए हैं, जिसमें पिछले चार हफ्तों में $3.2 बिलियन निकाले गए हैं। कमोडिटी इक्विटी फंड्स ने इस हफ्ते अतिरिक्त $1.5 बिलियन और मार्च 2026 से $8.6 बिलियन का नुकसान झेला है। पसंदीदा थीम से यह व्यापक वापसी निवेश रणनीतियों के बड़े रीकैलिब्रेशन (Recalibration) का संकेत देती है।

लीडरशिप में बदलाव और भारत में कम होती निकासी

जिस लीडरशिप ने पहले दक्षिण कोरिया और ताइवान को AI ट्रेड (AI Trade) से और ब्राजील को कमोडिटी की तेजी से फायदा पहुंचाया था, वह अब धीमी पड़ रही है। दक्षिण कोरिया, जिसने रिकॉर्ड निकासी देखी थी, इस हफ्ते $587 मिलियन की अतिरिक्त निकासी का सामना कर रहा है। ताइवान में भी निकासी की गति धीमी हुई है। ब्राजील ने दिसंबर 2024 के बाद सबसे बड़ी निकासी देखी, जिसमें $230 मिलियन निकाले गए।

भारत में, हालांकि अभी भी निवेश का प्रवाह धीमा है, लेकिन निकासी की रफ्तार में कमी आई है। मई में निकासी $702 मिलियन रही, जो अप्रैल के $1.5 बिलियन और मार्च के रिकॉर्ड $3.5 बिलियन से कम है। भारत पर केंद्रित फंड फ्लोज़ (Fund Flows) पिछले दो हफ्तों में स्थिर हुए हैं, जो करीब $6 बिलियन की 11-हफ्ते की निकासी की अवधि के बाद हुआ है। लॉन्ग-ओनली फंड्स पर लगातार दबाव के बावजूद, ETF इनफ्लोज़ (ETF Inflows) ने कुछ बिकवाली को ऑफसेट (Offset) करने में मदद की है। खास बात यह है कि जापान के भारत में निवेश में रिकॉर्ड $150 मिलियन की निकासी देखी गई। व्यापक EM ट्रेंड के विपरीत, भारत में डायरेक्ट फॉरेन इन्वेस्टमेंट (FDI) इनफ्लोज़ 2025-26 में सालाना 17.2% बढ़कर $94.5 बिलियन हो गया, जो दीर्घकालिक पूंजी के लिए लचीलापन दिखाता है।

वैल्यूएशन और सेक्टरल बदलावों का विश्लेषण

उभरते बाजारों में एक बड़ा स्ट्रक्चरल (Structural) बदलाव आया है, जो कमोडिटी फोकस से टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर (Semiconductor) और AI सप्लाई चेन (Supply Chain) की ओर बढ़ा है। यह बदलाव नॉर्थ एशियन (North Asian) प्लेटफॉर्म्स और चिप निर्माताओं के विकास से प्रेरित है, जिसमें इंटरनेट/सॉफ्टवेयर और सेमीकंडक्टर में EM का एक्सपोजर (Exposure) पिछले एक दशक में तीन गुना हो गया है। उदाहरण के लिए, दक्षिण कोरिया की SK Hynix जैसी कंपनियां AI हार्डवेयर के लिए महत्वपूर्ण हैं, खासकर हाई बैंडविड्थ मेमोरी (High Bandwidth Memory) में। ताइवान की सेमीकंडक्टर निर्माण में भी अहम भूमिका है, जो वैश्विक आपूर्ति का लगभग 90% उत्पादन करता है।

इस तकनीकी एकीकरण के बावजूद, उभरते बाजार के इक्विटी (Equities) प्राइस-टू-अर्निंग रेश्यो (Price-to-Earnings Ratios) के आधार पर अमेरिकी कंपनियों की तुलना में आकर्षक डिस्काउंट (Discount) पर ट्रेड कर रहे हैं। हालांकि, इन AI ग्रोथ स्टोरीज (AI Growth Stories) की स्थिरता परखी जा रही है। "इन्वोल्यूशन रिस्क" (Involution Risk), जो चीन जैसे प्रतिस्पर्धी बाजारों में तीव्र मूल्य युद्धों का वर्णन करता है, एक चुनौती पेश करता है। यदि AI कंपनियां इनोवेशन को मुनाफे में नहीं बदल पाती हैं, तो आकर्षक वैल्यूएशन जोखिम को उचित नहीं ठहरा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, AI इनोवेशन का अमेरिका और चीन में केंद्रीकरण का मतलब है कि EM अर्थव्यवस्थाएं अक्सर सीधे AI प्रगति से लाभान्वित होने के बजाय कच्चे माल और घटकों की आपूर्ति करती हैं, जो "सोने की खुदाई करने वालों को फावड़े बेचने" जैसा है।

उभरते बाजारों के लिए बियर केस (Bear Case)

उभरते बाजारों से वर्तमान पूंजी निकासी कई जोखिमों को उजागर करती है। लॉन्ग-ओनली रणनीतियों पर दबाव का केंद्रीकरण बताता है कि एक्टिव निवेशक चुनिंदा रूप से फंड निकाल रहे हैं, जो व्यापक बाजार में गिरावट का संकेत दे सकता है। इसके अलावा, कमोडिटी-लिंक्ड अर्थव्यवस्थाओं से दूर जाने की प्रवृत्ति, जो पहले कमजोर डॉलर और कम तेल की कीमतों से समर्थित थी, अनुकूल मैक्रोइकॉनोमिक (Macroeconomic) स्थितियों के उलटफेर का संकेत देती है। वर्तमान माहौल, जिसमें भू-राजनीतिक तनाव, मजबूत अमेरिकी डॉलर, बढ़ती बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) और उच्च कच्चा तेल की कीमतें शामिल हैं, उभरते बाजारों के लिए एक चुनौतीपूर्ण पृष्ठभूमि तैयार करती है।

उभरते बाजार आमतौर पर अपनी वित्तीय संरचनाओं के कारण विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। विदेशी पूंजी पर उनकी निर्भरता उन्हें वैश्विक जोखिम भावना और ब्याज दर नीतियों में बदलाव के प्रति संवेदनशील बनाती है। हालांकि ETF में कुछ लचीलापन देखा गया है, लेकिन यदि समग्र निकासी बनी रहती है तो यह अस्थायी हो सकता है। ऐतिहासिक रूप से, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता की अवधियों के दौरान उभरते बाजारों ने महत्वपूर्ण अस्थिरता दिखाई है।

भविष्य का दृष्टिकोण (Future Outlook)

उभरते बाजारों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है, जो वैश्विक मैक्रोइकॉनोमिक रुझानों और AI व कमोडिटी थीम की लंबी अवधि पर निर्भर करेगा। हालांकि कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि ब्याज दरों में गिरावट और चीनी निर्यात की मजबूती जैसे कारकों से 2026 में उभरते बाजार के स्टॉक में लगभग 13% मूल्य रिटर्न दिख सकता है, लेकिन वर्तमान निकासी का रुझान अल्पावधि में सावधानी का सुझाव देता है। जोखिम लेने की क्षमता का चल रहा पुनर्मूल्यांकन और संभावित आगे की पूंजी रोटेशन (Capital Rotation) प्रमुख कारक होंगे। AI इंफ्रास्ट्रक्चर (AI Infrastructure) और सप्लाई चेन समायोजन जैसे संरचनात्मक चालकों पर ध्यान केंद्रित करना चुनिंदा उभरते बाजारों के लिए दीर्घकालिक संभावना प्रदान करता है, लेकिन महत्वपूर्ण अल्पावधि चुनौतियां बनी हुई हैं।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.