नेपाल में **26 अगस्त** को आए ग्लेशियर बर्बादी के **11** दिन बाद अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट टनल से एक चीनी नागरिक 'लुहाईताओ' को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इस आपदा में अब तक **1,300** से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और देश की **10%** बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो गई है।
राहत की खबर के बीच बड़ी आपदा
अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की टनल में 225 मीटर की गहराई पर फंसे चीनी नागरिक लुहाईताओ का मिलना एक चमत्कार माना जा रहा है। इससे एक दिन पहले ही त्रिशूली 3ए प्लांट से दो नेपाली कर्मचारियों को भी सुरक्षित बचाया गया था। हालांकि, उत्तरी और मध्य नेपाल में मलबे के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
पावर सेक्टर पर गहरा असर
26 अगस्त को हुए आइस-रॉक एवलांच के कारण नेपाल का ऊर्जा क्षेत्र पूरी तरह चरमरा गया है। लगभग 900 कर्मचारी एक दर्जन से ज्यादा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स साइटों पर फंसे हुए थे। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, देश को 200 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ है।
आगे की चुनौतियां
इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए रिस्क असेसमेंट को बदल दिया है। डेवलपर्स अब भविष्य के प्रोजेक्ट्स में ग्लेशियर आउटबर्स्ट जैसी आपदाओं से निपटने के लिए अधिक मजबूत डिजाइनों पर विचार करेंगे। इसके साथ ही, बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर पर भी बड़े दावों का दबाव बढ़ेगा। निवेशकों की नजर अब बहाली की टाइमलाइन और ऊर्जा स्थिरता पर बनी हुई है, क्योंकि देश की 10% क्षमता का नुकसान आने वाले महीनों में बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
