Gwadar Port: चीन की बढ़ी मुश्किलें, सुरक्षा और खराब कमर्शियल रिटर्न से निवेश पर पुनर्विचार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gwadar Port: चीन की बढ़ी मुश्किलें, सुरक्षा और खराब कमर्शियल रिटर्न से निवेश पर पुनर्विचार

पाकिस्तान का Gwadar Port प्रोजेक्ट लगातार सुरक्षा खतरों और कमर्शियल विफलता से जूझ रहा है। जहाजों की आवाजाही न के बराबर होने के कारण बीजिंग अब अपनी रणनीति बदल रहा है और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश को लेकर सतर्क हो गया है।

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का मुख्य स्तंभ माने जाने वाला Gwadar Port प्रोजेक्ट अब गहरे संकट में है। इस प्रोजेक्ट को चीन के लिए एक शॉर्टकट समुद्री मार्ग के तौर पर देखा गया था, लेकिन भारी लागत के बावजूद यहाँ उम्मीद के मुताबिक शिपिंग ट्रैफिक नहीं आ रहा है। यह प्रोजेक्ट उन निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक है, जो भू-राजनीतिक स्थिरता पर निर्भर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाते हैं।\n\nइस असफलता की दो मुख्य वजहें हैं: सुरक्षा और भूगोल। बलूचिस्तान क्षेत्र में सुरक्षा खतरों के चलते चीनी कर्मियों और संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए भारी भरकम संसाधन खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा, पहाड़ी रास्तों के कारण कार्गो ट्रांसपोर्टेशन काफी महंगा और धीमा हो गया है। यही कारण है कि इंटरनेशनल शिपिंग कंपनियां मिडल ईस्ट और साउथ एशिया के अन्य विकसित पोर्ट्स को ही प्राथमिकता दे रही हैं।\n\nफाइनेंशियल मोर्चे पर देखें तो पोर्ट से नाममात्र की कमाई हो रही है। प्रोजेक्ट एग्रीमेंट के तहत रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा चीनी कंपनियों के पास जाता है, लेकिन कमर्शियल एक्टिविटी न होने से इनकम का कोई जरिया नहीं बचा है। पाकिस्तान की आर्थिक अस्थिरता ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है। चीन ने हाल के दिनों में अपने विदेशी खर्चों में कटौती शुरू कर दी है और रेलवे जैसे अन्य प्रोजेक्ट्स में भी फंडिंग कम कर दी है।\n\nअब जानकारों का मानना है कि बीजिंग बड़े और महंगे प्रोजेक्ट्स के बजाय छोटे और सुरक्षित निवेशों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। Gwadar Port को शायद एक विशाल ट्रेड हब के बजाय एक छोटे और मजबूत मिलिट्री-कमर्शियल बेस में बदला जा सकता है। भारी निवेश और कम लॉन्ग-टर्म रिटर्न के बीच फंसा यह प्रोजेक्ट अब पूरे CPEC की आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल उठा रहा है।

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