चीन और पाकिस्तान ने अक्टूबर में शिनजियांग में 'Karakoram 2026' नाम से पहली जॉइंट आर्मी एक्सरसाइज का ऐलान किया है। क्षेत्रीय सुरक्षा में आते इस बदलाव के बीच, भारतीय निवेशकों के लिए 'Aatmanirbhar Bharat' के तहत घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री का महत्व और बढ़ गया है।
चीन और पाकिस्तान की सेनाएं इस साल अक्टूबर में शिनजियांग के कोर्ला क्षेत्र में 'Karakoram 2026' युद्धाभ्यास करने जा रही हैं। यह पहली बार है जब दोनों देश जमीनी स्तर पर (Army-to-Army) ट्रेनिंग कर रहे हैं। इस ड्रिल में मुख्य रूप से हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशंस, काउंटर-टेररिज्म और ड्रोन वॉरफेयर पर फोकस किया जाएगा।
भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए क्या है संकेत?
यह युद्धाभ्यास बताता है कि दोनों देशों के बीच तकनीकी और सामरिक तालमेल गहरा हो रहा है। चीन लगातार पाकिस्तान को HQ-17AE जैसे डिफेंस सिस्टम सप्लाई कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए अपनी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूत करना अनिवार्य हो गया है। भारतीय निवेशक अक्सर डिफेंस सेक्टर की हलचल पर नजर रखते हैं, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा तनाव का सीधा असर सरकार के डिफेंस बजट और प्रोक्योरमेंट पॉलिसी पर पड़ता है।
किन कंपनियों पर रखें नजर?
हालांकि ऐसी ड्रिल्स का भारतीय शेयरों पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ता, लेकिन ये 'Aatmanirbhar Bharat' की थीम को मजबूती देते हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), मझगांव डॉक (Mazagon Dock), और भारत डायनेमिक्स (BDL) जैसी कंपनियों पर निवेशकों की खास नजर रहती है। इन कंपनियों का लॉन्ग-टर्म ऑर्डर बुक ग्रोथ सीधा सरकारी खर्च पर निर्भर करता है।
आने वाले समय में, डिफेंस बजट का आवंटन और सरकार द्वारा जारी होने वाले नए कॉन्ट्रैक्ट्स ही इस सेक्टर की चाल तय करेंगे। निवेशकों को अब अगले डिफेंस बजट की घोषणाओं का इंतजार रहेगा।
