तिब्बत-नेपाल बॉर्डर पर एक खतरनाक 'बैरियर लेक' बनने के बाद चीनी प्रशासन ने 'लेवल-4' की इमरजेंसी घोषित कर दी है। यह झील **20 लाख क्यूबिक मीटर** पानी जमा कर चुकी है, जिससे अहम ट्रेड हब Gyirong पोर्ट के तबाह होने का खतरा पैदा हो गया है।
तिब्बत और नेपाल की सीमा पर बाढ़ की तबाही के बाद हालात गंभीर हो गए हैं। चोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम पर मलबे के जमा होने से एक विशाल प्राकृतिक झील (बैरियर लेक) बन गई है। फिलहाल इसमें 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी है, लेकिन जानकारों का अनुमान है कि अगले 72 घंटों में यह मात्रा 30 लाख क्यूबिक मीटर तक पहुंच सकती है, जिससे बांध के टूटने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
ट्रेड हब पर मंडराया संकट
इस झील के फटने का सबसे बुरा असर Gyirong पोर्ट पर पड़ सकता है, जो चीन और नेपाल के बीच व्यापार और लॉजिस्टिक्स का एक प्रमुख केंद्र है। अचानक पानी छोड़े जाने से सड़कें, बॉर्डर की सुविधाएं और स्थानीय बस्तियां पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक आवाजाही ठप होने की आशंका है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में चुनौतियों का पहाड़
चीनी सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए इंजीनियरिंग फर्म 'China Anneng' को तैनात किया है। उबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाका, मोटी कीचड़ और घने जंगल के कारण ग्राउंड टीमों का वहां पहुंचना नामुमकिन सा हो गया है। राहत कार्यों के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर 3D मैप्स और थर्मल इमेजिंग की मदद ली जा रही है ताकि लापता लोगों की तलाश की जा सके।
सरकारी एजेंसियों का एक्शन प्लान
इस आपदा को रोकने के लिए 'People’s Liberation Army Western Theatre Command' और 'National Space Administration' मिलकर काम कर रहे हैं। सैटेलाइट इंटेलिजेंस के जरिए पल-पल की निगरानी की जा रही है, ताकि बारिश से पहले इस झील के पानी को सुरक्षित तरीके से निकाला जा सके और बड़ी तबाही को टाला जा सके।
