कनाडा के अधिकारी Mark Carney द्वारा अमेरिकी नेतृत्व पर तंज कसने के बाद दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर और गहरा गया है। **$20 बिलियन** के व्यापार पर **50%** तक के टैरिफ लागू होने से स्टील, अप्लायंसेज और एग्रीकल्चर सेक्टर में हड़कंप है, साथ ही कनाडा अब यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ नजदीकी बढ़ाने की तैयारी में है।
ओटावा और वाशिंगटन के बीच बढ़ता तनाव अब सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि एक बड़े ट्रेड वॉर में तब्दील हो चुका है। हाल ही में Mark Carney ने C$70 बिलियन के क्लीन-एनर्जी इन्वेस्टमेंट पर बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के अंदाज की नकल की, जिसने आग में घी का काम किया है।
ट्रेड वॉर का असर
8 सितंबर से लागू हुए नए नियमों के तहत अमेरिका ने कनाडा से होने वाले करीब US$20 बिलियन के एक्सपोर्ट पर 50% का भारी टैक्स लगा दिया है। जवाब में कनाडा ने भी अमेरिका से आने वाले सामान पर 15% से 50% तक के टैरिफ लगा दिए हैं। इसका सीधा असर स्टील, घरेलू उपकरण और कृषि उपकरणों के कारोबार पर पड़ रहा है, जिससे कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट और लॉजिस्टिक्स संभालना मुश्किल हो गया है।
नया आर्थिक रुख: कनाडा का EU की ओर झुकाव
इस संकट से निपटने के लिए कनाडा अब एक नई स्ट्रैटेजी पर काम कर रहा है। कनाडा की नजर अब European Union (EU) के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने पर है। खबरें हैं कि कनाडा EU में एसोसिएट मेंबर बनने की दिशा में चर्चा कर रहा है, ताकि क्रिटिकल मिनरल्स, डिफेंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर में नई राहें खोजी जा सकें। अमेरिकी प्रशासन ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है, जिससे मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए जियोपॉलिटिकल रिस्क और बढ़ गया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस ट्रेड वॉर से दो बड़े खतरे पैदा हो रहे हैं: लागत में उतार-चढ़ाव (Cost Volatility) और ऑपरेशनल अनिश्चितता। यदि कनाडा यूरोप के करीब जाता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कोई बातचीत शुरू होती है या यह व्यापारिक जंग और लंबी खिंचेगी।
