कनाडा सरकार अब अपनी अर्थव्यवस्था को अमेरिका पर निर्भरता से बाहर निकालने की नई रणनीति पर काम कर रही है। इस योजना के तहत कनाडा साल के अंत तक भारत के साथ एक महत्वपूर्ण ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreement) फाइनल करना चाहता है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए निवेश और व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे।
कनाडा की सरकार ने अपनी विदेशी और आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव का ऐलान किया है। यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में पेश की गई इस नई रणनीति का मुख्य मकसद अमेरिका पर अत्यधिक व्यापारिक निर्भरता को कम करना है। इसके लिए कनाडा 'मिडल-पावर' देशों का एक गठबंधन तैयार कर रहा है, ताकि वाशिंगटन की अस्थिर नीतियों के असर से अपनी इकोनॉमी को बचाया जा सके।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
कनाडा ने अगले एक दशक में अमेरिका के बाहर अपने ट्रेड वॉल्यूम को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसमें भारत को एक प्राथमिक साझीदार के रूप में देखा जा रहा है। अगर यह ट्रेड डील समय पर पूरी होती है, तो रिसोर्स, टेक्नोलॉजी और एनर्जी जैसे सेक्टर में भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी निवेश और बेहतर मार्केट एक्सेस की संभावनाएं बढ़ेंगी।
'वैल्यूज-बेस्ड रियलिज्म' की रणनीति
कनाडा सरकार अब 'वैल्यूज-बेस्ड रियलिज्म' (Values-based realism) एप्रोच अपना रही है। इसके तहत केवल नॉर्थ अमेरिका तक सीमित न रहकर यूरोपियन यूनियन और पैसिफिक रिम (Pacific Rim) जैसे क्षेत्रों के साथ सीधा जुड़ाव बढ़ाया जाएगा। यह बदलाव कनाडा के लिए एक स्थिर आर्थिक माहौल बनाने की कोशिश है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि भारत और कनाडा के बीच होने वाली प्रस्तावित बातचीत कितनी तेजी से आगे बढ़ती है। टैरिफ में कटौती और किन विशेष सेक्टर्स को इस डील में जगह मिलती है, ये वो बड़े ट्रिगर्स होंगे जो आने वाले समय में मार्केट का रुख तय करेंगे। फिलहाल, कनाडा इस नई आर्थिक डगर पर कितनी कुशलता से आगे बढ़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
