Caddell Construction: मिलान लेबर केस में **31 मिलियन यूरो** का सेटलमेंट, कंपनी पर अभी भी कानूनी शिकंजा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Caddell Construction: मिलान लेबर केस में **31 मिलियन यूरो** का सेटलमेंट, कंपनी पर अभी भी कानूनी शिकंजा

अमेरिका की Caddell Construction ने मिलान में अपने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास प्रोजेक्ट के दौरान हुए लेबर एक्सप्लोइटेशन मामले को सुलझाने के लिए **31 मिलियन यूरो** का सेटलमेंट किया है। कंपनी पर लगभग **300** प्रवासी श्रमिकों को बेहद कम मजदूरी देने का आरोप था, जिनमें से ज्यादातर भारतीय थे।

अलाबामा की दिग्गज कंस्ट्रक्शन कंपनी Caddell Construction ने इटली के मिलान में नए अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के निर्माण के दौरान सामने आए लेबर एक्सप्लोइटेशन के आरोपों को सुलझाने के लिए 31 मिलियन यूरो का भारी भरकम सेटलमेंट किया है। न्यायिक जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि कंपनी ने 300 के करीब प्रवासी श्रमिकों, जिनमें से अधिकांश भारत से थे, को 2 यूरो प्रति घंटे से भी कम वेतन दिया। यह इटली के अनिवार्य न्यूनतम वेतनमान 13.19 यूरो प्रति घंटे से बहुत कम था।

सेटलमेंट और मुआवजा

इस समझौते में श्रमिकों का बकाया वेतन, हर्जाना और इतालवी सोशल सिक्योरिटी अथॉरिटीज का योगदान शामिल है। कुल 31 मिलियन यूरो में से 19.7 मिलियन यूरो सीधे श्रमिकों के लिए आवंटित किए गए हैं, जहाँ व्यक्तिगत आधार पर किसी कर्मचारी को 90,000 यूरो तक मिल सकते हैं।

ऑपरेशनल रिस्क और कंपनी की स्थिति

फिलहाल Caddell Construction कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासन की निगरानी में है। इसका मतलब है कि प्रोजेक्ट के कामकाज पर सख्त न्यायिक कंट्रोल है, जिससे प्रोजेक्ट में देरी और प्रशासनिक खर्चों के बढ़ने का बड़ा खतरा बना हुआ है।

कानूनी मुश्किलें बरकरार

हालांकि सिविल मामलों का निपटारा हो गया है, लेकिन इटली के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कंपनी और उसके दो प्रबंधकों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही अभी भी सक्रिय है। यह कानूनी अनिश्चितता न केवल कंपनी की प्रतिष्ठा के लिए खतरा है, बल्कि भविष्य में सरकारी ठेके हासिल करने की इसकी क्षमता पर भी सवालिया निशान लगाती है, क्योंकि ऐसे कॉन्ट्रैक्ट्स में सख्त एथिकल और लेबर स्टैंडर्ड्स की जरूरत होती है।

इतालवी श्रम मंत्रालय और स्थानीय यूनियनों ने इस मामले को प्रवासी अधिकारों के लिए एक 'टेस्ट केस' के रूप में देखा है। प्रभावित 265 श्रमिकों को सरकार ने विशेष रेजिडेंस परमिट भी दिए हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.