अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में फिर उबाल आ गया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) **$85** प्रति बैरल के पार निकल गया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से ऊर्जा शिपमेंट को खतरा पैदा हो गया है। ईरान की ओर से निर्यात रोकने की धमकी ने ग्लोबल कमोडिटी मार्केट (Global Commodity Market) में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
रणनीतिक चोकपॉइंट और आर्थिक असर
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए एक बेहद अहम रास्ता है। पहले भी इस रास्ते पर किसी भी तरह की रुकावट ने कच्चे तेल, फर्टिलाइजर और अन्य जरूरी कमोडिटीज की कीमतों में भारी इजाफा किया है। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक (Importer) है, इसलिए लगातार बढ़ती कीमतें इंपोर्ट बिल को बढ़ा सकती हैं, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) बढ़ सकता है और महंगाई (Inflation) पर दबाव आ सकता है।
ऊर्जा की बढ़ती लागत से ट्रांसपोर्टेशन, एविएशन, पेंट्स और केमिकल जैसे सेक्टर्स की कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर भी असर पड़ सकता है।
तनाव में बढ़ोतरी
गुरुवार को स्थिति तब और बिगड़ गई जब अमेरिकी सेना ने तेहरान और सेमनान प्रांत के आसपास के इलाकों को निशाना बनाकर हमले किए। ये इलाके बैलिस्टिक मिसाइल और स्पेस-संबंधी उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी सेना ने एक जहाज को भी रोका जो कथित तौर पर नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) का उल्लंघन कर रहा था। इसके जवाब में, ईरानी अधिकारियों ने बहरीन और कुवैत की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले की खबरें दी हैं, साथ ही रेवोल्यूशनरी गार्ड (Revolutionary Guard) ने धमकी दी है कि अगर नाकाबंदी जारी रही तो क्षेत्र से सभी ऊर्जा निर्यात रोक दिए जाएंगे।
आगे की अस्थिरता पर नजर
वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ा खतरा एक पूर्ण क्षेत्रीय संघर्ष (Full-scale Regional Conflict) का है, जो सप्लाई चेन को और बाधित कर सकता है। हालांकि, कीमतें अभी भी संघर्ष के चरम पर देखे गए लगभग $120 के स्तर से नीचे हैं, लेकिन अस्थिरता (Volatility) काफी ज्यादा है। निवेशकों को होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग ट्रैफिक (Shipping Traffic) पर आधिकारिक अपडेट्स और प्रमुख तेल उत्पादक देशों से उत्पादन समायोजन (Output Adjustments) के बारे में किसी भी नई घोषणा पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। इस व्यापार मार्ग को किसी भी तरह की लंबी रुकावट या महत्वपूर्ण प्रतिबंध से ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, जिससे इम्पोर्टिंग देशों की कॉरपोरेट प्रॉफिटेबिलिटी (Corporate Profitability) और व्यापक आर्थिक स्थिरता (Economic Stability) दोनों पर असर पड़ेगा।
