Luiz Inacio Lula da Silva ने चौथी बार ब्राजील की सत्ता संभाली है, लेकिन उनके सामने **82%** GDP से ज्यादा का कर्ज और रूढ़िवादी विपक्ष के साथ तालमेल बिठाने की बड़ी चुनौती है।
राष्ट्रपति Luiz Inacio Lula da Silva ने चौथी बार सत्ता में वापसी की है, लेकिन यह सफर आसान नहीं रहने वाला है। ब्राजील की अर्थव्यवस्था वर्तमान में 82% GDP से अधिक के भारी-भरकम कर्ज के तले दबी है। इसके साथ ही, ऊँची ब्याज दरों ने सरकारी और घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे सोशल वेलफेयर और राजकोषीय अनुशासन (fiscal discipline) के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
विधायी गतिरोध (Legislative Gridlock) का खतरा
सरकार के सामने सबसे बड़ी बाधा संसद का समीकरण है। Liberal Party और उनके सहयोगी दलों का निचली सदन और सीनेट दोनों में दबदबा है। लूला सरकार के वेलफेयर कार्यक्रमों को लेकर विपक्ष कड़ा रुख अपना सकता है, जो प्रो-बिजनेस रिफॉर्म्स और खर्च में कटौती की वकालत करते हैं। किसी भी सरकारी खर्च को मंजूरी दिलाने के लिए अब कठिन बातचीत और समझौते करने पड़ेंगे, जो विकास की गति को सीमित कर सकते हैं।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स और इमर्जिंग मार्केट्स पर असर
इमर्जिंग मार्केट्स में निवेश करने वाले वैश्विक निवेशकों के लिए ब्राजील की यह स्थिति एक बड़ा केस स्टडी है। जब किसी बड़ी अर्थव्यवस्था में राजनीतिक अस्थिरता और उच्च कर्ज का मेल होता है, तो इसका असर वैश्विक सेंटीमेंट पर भी पड़ता है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) अब ब्राजील के राजकोषीय फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं, जिसका परोक्ष असर भारत जैसे अन्य उभरते बाजारों पर भी दिख सकता है।
आगे क्या होगा?
आने वाले समय में सरकार के बजट संबंधी फैसले और विपक्ष के साथ होने वाली बातचीत ही यह तय करेगी कि ब्राजील की क्रेडिट रेटिंग सुरक्षित रहेगी या नहीं। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस राजनीतिक टकराव के कारण ब्राजीलियाई एसेट्स में उतार-चढ़ाव (volatility) बने रहने की पूरी संभावना है।
