बेल्जियम के प्रधानमंत्री Bart De Wever तीन दिन की भारत यात्रा पर हैं। इस दौरे का मुख्य फोकस रक्षा (Defence), मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करना है।
रिश्तों में नया मोड़: डायमंड से डिफेंस तक
दो दशकों में पहली बार बेल्जियम के किसी शीर्ष नेतृत्व का भारत दौरा काफी अहम माना जा रहा है। रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री Theo Francken के साथ आए PM Bart De Wever का लक्ष्य बेल्जियम-भारत के रिश्तों को परंपरागत डायमंड ट्रेड से निकालकर हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन एनर्जी की ओर ले जाना है। दोनों देश अपने डिफेंस इकोसिस्टम को एक साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे भारत के स्थानीय डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के लिए नए मौके बन सकते हैं।
एनर्जी सेक्टर पर दांव
ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग का एक बड़ा उदाहरण काकीनाडा में बन रही 2 GW की इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी है। यह प्रोजेक्ट ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में बड़ी छलांग का संकेत है। निवेशक इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स पर बारीक नजर रख रहे हैं, क्योंकि ये हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी की स्वीकार्यता और सप्लाई चेन की मजबूती को दर्शाते हैं।
व्यापारिक आंकड़े और भविष्य की राह
वित्तीय वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच $13.01 बिलियन का ट्रेड हुआ है। हालांकि अभी भी डायमंड ट्रेड एक बड़ा आधार है, लेकिन नई सरकार का जोर अब टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और ग्रीन एनर्जी पर है।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि इस साझेदारी की सफलता भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की गति पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, ग्लोबल एनर्जी मार्केट में होने वाली हलचल और हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत भी एक बड़ा फैक्टर है। आने वाले महीनों में होने वाली मिनिस्ट्रियल बातचीत और मैन्युफैक्चरिंग माइलस्टोन्स पर मार्केट की नजर बनी रहेगी।
