Bank of Japan ने अपनी बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट को बढ़ाकर **1.25%** कर दिया है। पिछले **31 सालों** में यह सबसे ऊंचा स्तर है, जिसका मकसद महंगाई पर काबू पाना और जापानी येन (Yen) को मजबूती देना है।
नॉर्मलाइजेशन की ओर कदम
दो दिनों की लंबी मौद्रिक नीति बैठक के बाद बैंक ऑफ जापान ने दरों को 1.0% से बढ़ाकर 1.25% करने का फैसला लिया है। सालों तक अल्ट्रा-लो इंटरेस्ट रेट (ultra-low interest rates) बनाए रखने के बाद, केंद्रीय बैंक का यह कदम अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस फैसले की मुख्य वजह महंगाई पर नकेल कसना और जापानी येन में आई भारी कमजोरी को थामना है। येन के कमजोर होने से जापान में इंपोर्ट की लागत बढ़ गई थी, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव था। वर्तमान में येन 155 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। बैंक को उम्मीद है कि अब ऊंची ब्याज दरों से येन ग्लोबल निवेशकों के लिए आकर्षक बनेगा।
ग्लोबल मार्केट पर असर
यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि यह 'कैरी ट्रेड' (carry trade) को प्रभावित करेगा। लंबे समय से निवेशक जापान से कम ब्याज दर पर पैसा उधार लेकर विदेशों में निवेश कर रहे थे। अब जैसे-जैसे जापान में उधार लेना महंगा होगा, निवेशक अपने फंड्स वापस खींच सकते हैं। इससे दुनिया भर के स्टॉक और बॉन्ड मार्केट में वोलेटिलिटी (volatility) बढ़ने का डर है।
भारत के लिए संकेत
यह फैसला US Federal Reserve द्वारा हाल ही में बढ़ाई गई दरों के साथ मेल खाता है। दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक अब महंगाई को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, इस वैश्विक लिक्विडिटी (liquidity) में बदलाव का असर भारतीय जैसे उभरते बाजारों पर भी पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है।
