थाईलैंड के **41** प्रांतों में आई भीषण बाढ़ से **$327 मिलियन** का भारी नुकसान हुआ है। इस आपदा ने देश की जीडीपी ग्रोथ को खतरे में डाल दिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और कमोडिटी मार्केट में हलचल बढ़ सकती है।
थाईलैंड में बाढ़ का कहर जारी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा से अब तक $327 मिलियन का आर्थिक नुकसान हो चुका है। संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश की सालाना जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 2.1% कर दिया गया है, जो पहले के अनुमान से 0.3% कम है। फिलहाल करीब 80,000 लोग फंसे हुए हैं और 5,80,000 से ज्यादा परिवार इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं।
निवेशकों के लिए रायगंज (Rayong) पर नजर
निवेशकों के लिए सबसे चिंताजनक इलाका 'रायगंज' (Rayong) है, जो दक्षिण-पूर्वी एशिया का बड़ा औद्योगिक केंद्र है। यहाँ कई पेट्रोकेमिकल और ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। यदि इन प्लांटों में लंबे समय तक काम बंद रहता है, तो इसका असर सीधे ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ेगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर में पार्ट्स की किल्लत और सप्लाई बाधित होने से वैश्विक बाजारों में कीमतों में उछाल आ सकता है।
कमोडिटी बाजार पर असर
थाईलैंड चावल और चीनी का एक बड़ा निर्यातक देश है। बाढ़ के कारण कृषि भूमि और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान से इन कमोडिटीज के उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है। भारतीय निवेशक जो एग्रो-एक्सपोर्ट या कमोडिटी ट्रेड से जुड़े हैं, उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर सीमित है, लेकिन उन कंपनियों के शेयरों में दबाव देखा जा सकता है जिनका साउथ-ईस्ट एशिया में बड़ा कारोबार है। बैंकॉक की भौगोलिक स्थिति, जो समुद्र तल से काफी नीचे है, रिकवरी की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है, जिससे अगले कुछ हफ्तों तक संबंधित सेक्टरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
