ऑस्ट्रेलिया सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। लेटेस्ट स्टडी बताती है कि 80% से ज़्यादा टीनएजर्स अब भी TikTok और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव हैं। कंपनियां उम्र वेरिफिकेशन ठीक से नहीं कर पा रही हैं, जिससे सरकार सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे रही है।
बच्चों पर बैन बेअसर, 80% से ज़्यादा टीनएजर्स अब भी एक्टिव
ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बैन लगे 3 महीने हो चुके हैं, लेकिन एक नई स्टडी ने इस पॉलिसी की असलियत सामने ला दी है। eSafety Commissioner की रिपोर्ट के मुताबिक, बैन के बावजूद 10 से 15 साल के 80% से ज़्यादा टीनएजर्स रेगुलरली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार का मकसद बच्चों को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के जोखिमों से बचाना था, लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी चुनौतियां आ रही हैं।
टेक्नोलॉजी कंपनियों की नाकामी
यह स्टडी दिखाती है कि सरकार की पॉलिसी और टेक कंपनियों के एक्शन में बड़ा अंतर है। भले ही 10 से 15 साल के बच्चों के कुल अकाउंट्स में 52% से 42% की कमी आई है, लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। ज़्यादातर टीनएजर्स या तो अपने पुराने अकाउंट्स चला रहे हैं या फिर उम्र वेरिफिकेशन को चकमा देकर नए अकाउंट बना रहे हैं। TikTok, Snapchat और YouTube जैसी कंपनियां उम्र वेरिफाई करने के लिए भरोसेमंद सिस्टम न लागू कर पाने की वजह से मुश्किल में हैं।
टेक कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव, लग सकते हैं भारी जुर्माने
इन प्लेटफॉर्म्स पर नाबालिगों का लगातार एक्टिव रहना Meta Platforms, Snap Inc. और Alphabet Inc. जैसी बड़ी टेक कंपनियों के लिए बड़ा रेगुलेटरी और रेप्युटेशन रिस्क (Reputation Risk) खड़ा कर रहा है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने साफ कर दिया है कि वह धीमी रफ्तार से हो रहे कंप्लायंस (Compliance) से नाराज़ है। सरकार ने नॉन-कंप्लायंट कंपनियों के लिए जुर्माने को दोगुना करने का ऐलान किया है। इसके अलावा, eSafety रेगुलेटर Facebook, Instagram, Snapchat, TikTok और YouTube जैसे बड़े प्लेयर्स के कंप्लायंस स्टैंडर्ड्स की जांच कर रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
यह मामला निवेशकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भौगोलिक और उम्र-आधारित प्रतिबंधों को लागू करने में आ रही मुश्किलों को दिखाता है। ऑस्ट्रेलिया के अलावा, कई दूसरे देश भी इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और बच्चों के लिए इंटरनेट रेगुलेशन पर विचार कर रहे हैं। भविष्य में बड़े मार्केट्स में ऐसे रेगुलेशन सख्त होने पर इन टेक कंपनियों के लिए कंप्लायंस कॉस्ट (Compliance Cost) बढ़ सकती है, भारी जुर्माने लग सकते हैं और यूजर ग्रोथ स्ट्रेटेजी (User Growth Strategy) में बदलाव करने पड़ सकते हैं।
निवेशकों के लिए अगली बड़ी अपडेट eSafety ऑफिस की जांच के नतीजों से मिलेगी। अगर कंपनी पर भारी जुर्माना लगता है या उम्र वेरफिकेशन के लिए और कड़े तरीकों की मांग होती है, तो इसका असर ऑस्ट्रेलिया और दुनिया भर में इन कंपनियों के यूजर बेस और ऑपरेशनल कॉस्ट पर पड़ सकता है।
