एशियाई बाजारों पर आज दबाव साफ दिख रहा है। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और यूएस ट्रेजरी यील्ड के **5%** के स्तर को छूने से निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले बाजार सतर्क रुख अपनाए हुए है।
मंगलवार को एशियाई बाजारों में कारोबार काफी संभलकर हो रहा है। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं—क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और सरकारी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना।
क्रूड ऑयल और भू-राजनीतिक तनाव
ऊर्जा की कीमतों में तेजी का दौर जारी है। ब्रेंट क्रूड $106.96 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, जबकि यूएस क्रूड $102.68 पर कारोबार कर रहा है। सऊदी अरब में बुनियादी ढांचे पर हुए हालिया हमलों के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन के बाधित होने का डर सता रहा है। यदि ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो महंगाई को कंट्रोल करने के लिए सेंट्रल बैंक को ब्याज दरें (Interest Rates) और अधिक समय तक ऊंची रखनी पड़ सकती हैं, जो शेयर बाजार के वैल्यूएशन के लिए बिल्कुल भी अच्छा संकेत नहीं है।
बॉन्ड यील्ड का असर
यूएस 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2023 के बाद पहली बार 5% तक पहुंच गई है। जब बॉन्ड से सुरक्षित रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशक शेयरों से पैसा निकालकर बॉन्ड में शिफ्ट करने लगते हैं। इससे मार्केट पर सीधा दबाव बन रहा है। अब सबकी नजरें फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक पर हैं, जहां 90% संभावना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाएगी।
सेंट्रल बैंकों के बड़े फैसले
सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि बैंक ऑफ जापान पर भी निवेशकों की नजरें हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि शुक्रवार, 18 सितंबर को बैंक ऑफ जापान अपनी पॉलिसी रेट को 1.25% तक बढ़ा सकता है। इस कठिन माहौल में कंपनियों के मार्जिन पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है, क्योंकि कर्ज लेना महंगा हो रहा है। अब निवेशक ग्लोबल महंगाई के आंकड़ों और सेंट्रल बैंकों की कमेंट्री का बारीकी से इंतजार कर रहे हैं।
