अमृतसर से यूनाइटेड किंगडम (UK) के लिए रेडी-मेड गारमेंट्स की पहली 'ज़ीरो-ड्यूटी' (Zero-Duty) कार्गो शिपमेंट रवाना हो गई है। यह भारत-UK ट्रेड डील का नतीजा है, जो पहले **20%** तक के टैरिफ को खत्म कर भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।
टैरिफ हटने से एक्सपोर्टर्स को मिली बड़ी राहत
श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अमृतसर से यूनाइटेड किंगडम के लिए रेडी-मेड गारमेंट्स (Ready-made Garments) की पहली खेप रवाना हो चुकी है। यह भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत संभव हुआ है। इस डील से उत्तरी भारत के एक्सपोर्टर्स को अब दुनिया के बड़े इंपोर्ट मार्केट्स में बिना किसी ड्यूटी के एंट्री मिलेगी। इससे पहले, भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को 12% से 20% तक के भारी टैरिफ का सामना करना पड़ता था, जो उनके प्रोडक्ट्स को महंगा बना देता था। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के अधिकारियों के मुताबिक, इस नए समझौते से 99% भारतीय प्रोडक्ट्स को 'ज़ीरो-ड्यूटी' एक्सेस मिल गया है।
एक्सपोर्ट मार्जिन पर असर
टैरिफ हटने से UK में भारतीय गारमेंट्स की लैंडेड कॉस्ट (Landed Cost) कम हो जाएगी। एक्सपोर्टर्स के लिए इसका मतलब या तो मौजूदा कीमतों पर बेहतर प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) या फिर कीमतों में छूट देकर मार्केट में ज्यादा कॉम्पिटिटिव (Competitive) बनना हो सकता है।
लॉजिस्टिक्स और रीजनल ट्रेड में तेजी की उम्मीद
हालांकि अमृतसर से पहले स्पोर्ट्स गुड्स, इंजीनियरिंग गुड्स और हरी मिर्च, बेबी कॉर्न जैसे पेरिशेबल आइटम्स का एक्सपोर्ट होता था, लेकिन अब गारमेंट सेक्टर में भी बड़ी तेजी की उम्मीद है। अमृतसर कार्गो टर्मिनल (Amritsar Cargo Terminal) की एफिशिएंसी (Efficiency) पर नजर रहेगी। एक्सपोर्ट वॉल्यूम (Export Volume) बढ़ने से रीजनल कार्गो फैसिलिटीज की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity Utilization) भी बढ़ेगी। लोकल एक्सपोर्टर्स की प्रोडक्शन कैपेसिटी और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स बनाए रखने की क्षमता UK मार्केट में उनकी हिस्सेदारी तय करेगी।
जोखिम और आगे क्या देखें?
निवेशकों को यह समझना होगा कि ट्रेड डील का फायदा सभी के लिए तुरंत नहीं होगा। एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल डिमांड में उतार-चढ़ाव, कॉटन और यार्न जैसे रॉ मटेरियल की कीमतों में बदलाव और इंटरनेशनल बायर्स की क्वालिटी की मांग को पूरा करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अगर UK इकोनॉमी (UK Economy) में मंदी आती है, तो इंपोर्ट ड्यूटी कम होने के बावजूद कपड़ों की डिमांड घट सकती है। अब आगे इस रीजन से तिमाही एक्सपोर्ट डेटा और लिस्टेड टेक्सटाइल कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रहेगी कि वे ऑर्डर बुक ग्रोथ (Order Book Growth) और मार्जिन एक्सपेंशन (Margin Expansion) के बारे में क्या कहते हैं।
