ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण एशियाई बाजारों में आज भारी गिरावट देखने को मिली। अमेरिका में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे भारी खर्च और उससे तुरंत रिटर्न न मिलने की चिंताओं के चलते निवेशक सहमे हुए हैं।
एशियाई शेयर बाजारों में आज उस समय हड़कंप मच गया जब निवेशकों ने अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर हो रहे निवेश को लेकर चिंता जताई। अमेरिकी टेक कंपनियों की हालिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि वे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च तो कर रही हैं, लेकिन उसका रिटर्न अभी तक उम्मीद के मुताबिक नहीं दिख रहा है। इस 'उत्साह से सावधानी' के बदलाव ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से जुड़े शेयरों में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है।
बाजार का हाल
जापान का Nikkei 225 इंडेक्स 2.6% और दक्षिण कोरिया का Kospi इंडेक्स 5.4% तक गिर गया। सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित रहीं, जिसमें Tokyo Electron में 5.6% और Advantest में 9.1% की बड़ी गिरावट देखी गई। हालांकि, मिला-जुला रुख भी रहा, जहां हांगकांग का Hang Seng इंडेक्स 1.2% ऊपर चढ़ा और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5% की बढ़त के साथ बंद हुआ।
भारतीय निवेशकों के लिए चिंता क्या है?
भारतीय बाजार के लिए मुख्य चिंता घरेलू IT सेक्टर पर पड़ने वाला असर है। भारतीय IT कंपनियां क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे कामों के लिए वैश्विक टेक दिग्गजों पर निर्भर हैं। यदि अमेरिका की बड़ी कंपनियां अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए खर्च में कटौती करती हैं, तो भारतीय IT फर्मों की ऑर्डर ग्रोथ धीमी हो सकती है। निवेशकों को आने वाले समय में Tata Consultancy Services, Infosys, और HCLTech के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
साथ ही, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय रुपये पर भी दबाव बना दिया है। महंगे कच्चे तेल से आयात बिल बढ़ता है, जो करंसी पर बुरा असर डालता है। आने वाली तिमाहियों में अमेरिकी टेक स्पेंडिंग के पैटर्न और तेल की कीमतों में स्थिरता ही तय करेगी कि भारतीय IT एक्सपोर्ट्स और रुपया किस दिशा में जाएंगे।
