भारत में मेडिकल महंगाई (Medical Inflation) जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उससे कई पुरानी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां अब नाकाफी साबित हो रही हैं। ऐसे में, जब आपको अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है, तो बाकी का खर्च आपकी जेब से जाने का खतरा बढ़ जाता है।
क्यों पुरानी पॉलिसियां पड़ सकती हैं कम?
स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। नई मेडिकल टेक्नोलॉजी, महंगी इलाज प्रक्रियाएं और अस्पतालों के बढ़ते चार्ज, इन सब की वजह से मेडिकल इन्फ्लेशन (Medical Inflation) तेजी से बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि कुछ साल पहले ली गई आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी शायद अब बड़े हॉस्पिटलाइजेशन के खर्चों को पूरा करने के लिए काफी न हो। ऐसे में, आपको भारी-भरकम बिल अपनी बचत से चुकाना पड़ सकता है।
कई लोग अपनी प्रोफेशनल लाइफ की शुरुआत में ही हेल्थ इंश्योरेंस ले लेते हैं, ताकि प्रीमियम कम रहे। लेकिन समय के साथ मेडिकल कॉस्ट बढ़ने पर, एक स्टैटिक सम एश्योर्ड (Static Sum Insured) वाली पुरानी पॉलिसी आज की हकीकत से मेल नहीं खा पाती। जो पॉलिसी पांच साल पहले पर्याप्त लगती थी, वह आज बड़े शहरों के मॉडर्न हॉस्पिटलों में सर्जरी या इलाज का एक छोटा सा हिस्सा ही कवर कर पाती है।
प्रीमियम रिन्यूअल से आगे देखें
जब भी पॉलिसी रिन्यूअल (Policy Renewal) का समय आता है, तो ज्यादातर लोग प्रीमियम की बढ़ती कीमतों पर ही ध्यान देते हैं। लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स (Financial Experts) का कहना है कि आपका ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि आपकी कवरेज (Coverage) कितनी है। यह देखना बहुत जरूरी है कि क्या आपका सम एश्योर्ड (Sum Insured) आपकी फैमिली साइज, उम्र और लाइफस्टाइल की जरूरतों के हिसाब से बढ़ा है। इसके अलावा, कुछ खास फीचर्स जैसे रेस्टोरेशन बेनिफिट (Restoration Benefit) – जो पॉलिसी ईयर में सम एश्योर्ड खत्म होने पर अपने आप उसे टॉप-अप कर देता है – और नो-क्लेम बोनस (No-Claim Bonus) के बारे में जानना भी आपकी सुरक्षा के लेवल को समझने में मदद करेगा।
बेहतर कवरेज के लिए समझदारी भरे विकल्प
बेसिक सम एश्योर्ड (Base Sum Insured) को बढ़ाना कभी-कभी महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ प्रीमियम भी बढ़ता है। ऐसे में, इंश्योरेंस कंपनियां एक किफायती विकल्प के तौर पर टॉप-अप (Top-up) या सुपर टॉप-अप (Super Top-up) प्लान ऑफर करती हैं। ये प्लान एक एडिशनल इंश्योरेंस लेयर की तरह काम करते हैं, जो एक तय सीमा (जिसे डिडक्टिबल कहते हैं) पूरी होने के बाद एक्टिवेट हो जाते हैं। थोड़े से एक्स्ट्रा प्रीमियम पर, आप अपनी मौजूदा बेस पॉलिसी को बदले बिना कवरेज लिमिट को काफी बढ़ा सकते हैं। स्टैंडर्ड टॉप-अप और सुपर टॉप-अप में से कौन सा चुनना है, यह आपकी मौजूदा कवरेज, बजट और हेल्थ रिस्क के आकलन पर निर्भर करेगा।
निवेशकों (Investors) और आम लोगों को हेल्थकेयर सेक्टर में बढ़ते खर्चों पर लगातार नजर रखनी चाहिए, ताकि उनका फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) हकीकत के अनुरूप रहे। अगला कदम यह होगा कि आप अपने इंश्योरेंस प्रोवाइडर (Insurance Provider) या किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (Certified Financial Planner) से संपर्क करें, ताकि संभावित हॉस्पिटलाइजेशन खर्चों का अनुमान लगाया जा सके और यह तय किया जा सके कि क्या आपकी मौजूदा कवरेज को तुरंत अपग्रेड करने की जरूरत है।
