भारत में होम इंश्योरेंस की पैठ अभी केवल **1%** के आसपास है। जागरूकता की कमी और महंगाई के कारण अंडर-इंश्योरेंस की समस्या बनी हुई है। निवेशकों के लिए यह सेक्टर भविष्य में ग्रोथ का बड़ा इंजन साबित हो सकता है।
अंडर-इंश्योरेंस का खतरा और महंगाई का असर
भारत में रियल एस्टेट किसी भी परिवार की सबसे बड़ी संपत्ति होती है, लेकिन इसके बावजूद होम इंश्योरेंस का दायरा बहुत सीमित है। एक बड़ी समस्या 'अंडर-इंश्योरेंस' की है। लोग सालों-साल पुरानी पॉलिसी को बिना अपडेट किए रिन्यू करवाते रहते हैं, जिससे महंगाई के दौर में कंस्ट्रक्शन और लेबर कॉस्ट के हिसाब से कवर की वैल्यू कम पड़ जाती है। आग या किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में, घर के मालिक को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, जो इंश्योरेंस कंपनियों के लिए भी क्लेम मैनेजमेंट के मामले में एक बड़ी चुनौती है।
IRDAI का 'भारत गृह रक्षा' दांव
भारतीय बीमा नियामक (IRDAI) ने इस समस्या को सुलझाने के लिए 'भारत गृह रक्षा' पॉलिसी को पेश किया है। इसका मुख्य उद्देश्य कवरेज को सरल बनाना है ताकि क्लेम के दौरान विवाद कम हों। कंपनियों के लिए यह एक स्टैंडर्ड पोर्टफोलियो तैयार करने का मौका है, जिससे कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट घट सकती है और अंडरराइटिंग बेहतर हो सकती है।
क्यों बढ़ रहा है इंश्योरेंस कंपनियों का फोकस?
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और इन्श्योरटेक (Insurtech) के दौर में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। ICICI Lombard और The New India Assurance जैसी दिग्गज कंपनियां अपने रिटेल पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने में लगी हैं।
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि मोटर या कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भरता कम करने के लिए होम इंश्योरेंस सेगमेंट बेहद अहम है। आने वाले समय में, जो कंपनियां अपने रिटेल प्रीमियम में होम इंश्योरेंस का योगदान बढ़ाएंगी और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन को मजबूत करेंगी, वही इस सेक्टर में लंबी रेस की घोड़ी साबित होंगी।
