भारत में शादियों का बजट अब **₹20 लाख** से लेकर **₹1 करोड़** के पार पहुंच रहा है। इसी के चलते वेडिंग इंश्योरेंस की डिमांड बढ़ रही है, जो वेन्यू कैंसिल होने या वेंडर की गड़बड़ी जैसे रिस्क से बचाती है।
भारतीय शादियां अब केवल रस्मों का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़े फाइनेंशियल प्रोजेक्ट में बदल गई हैं। ₹20 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक का बजट होने के कारण लोग पहले ही भारी पैसा एडवांस में खर्च कर देते हैं। ऐसे में अगर कोई अनहोनी हो जाए, तो लाखों का नुकसान होने का रिस्क रहता है।\n\n### कौन-सी कंपनियां हैं मैदान में?\n\nइस रिस्क को कवर करने के लिए ICICI Lombard, Bajaj Finserv और Oriental Insurance जैसी कंपनियां खास 'वेडिंग इंश्योरेंस' पॉलिसी पेश कर रही हैं। ये पॉलिसी वेंडर के नहीं आने, बिजली गुल होने, वेन्यू में डैमेज या किसी मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालात में फाइनेंशियल बैकअप का काम करती हैं।\n\n### प्रीमियम और मार्केट ट्रेंड\n\nफाइनेंशियल नजरिए से देखें तो इसका प्रीमियम काफी कम है, जो कुल इंश्योर्ड राशि का 0.2% से 0.4% तक ही होता है। हालांकि यह कंपनियों के लिए बहुत बड़ा रेवेन्यू सोर्स नहीं है, लेकिन ये 'स्पेशल इंश्योरेंस' के जरिए अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई कर रहे हैं। डेस्टिनेशन वेडिंग के बढ़ते चलन के साथ इसकी जरूरत भी बढ़ती जा रही है।\n\n### निवेश और क्लेम की सच्चाई\n\nनिवेशकों और पॉलिसीधारकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ये पॉलिसी हर चीज कवर नहीं करती। 'चेंज ऑफ हार्ट' (मन बदल जाना) या बिना किसी ठोस वजह के शादी रद्द करने पर कवर नहीं मिलता। साथ ही, फोर्स मेज्योर (Force Majeure) क्लॉज के तहत महामारी या लॉकडाउन को अक्सर बाहर रखा जाता है। क्लेम लेने के लिए डॉक्यूमेंटेशन बहुत सख्त होता है, इसलिए पॉलिसी लेने से पहले 'फाइन प्रिंट' यानी शर्तों को पढ़ना बेहद जरूरी है।
