जीवन बीमा पॉलिसी लैप्स (Lapse) होने का क्या है खतरा? जानिए कैसे करें रिवाइव

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AuthorAditya Rao|Published at:
जीवन बीमा पॉलिसी लैप्स (Lapse) होने का क्या है खतरा? जानिए कैसे करें रिवाइव

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भारत में लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम (Premium) का भुगतान चूकने पर तुरंत पॉलिसी बंद नहीं होती, बल्कि एक ग्रेस पीरियड (Grace Period) मिलता है। लेकिन, इसके बाद भी भुगतान न करने पर पॉलिसी लैप्स हो जाती है, जिससे आपकी वित्तीय सुरक्षा खत्म हो जाती है। पॉलिसी रिवाइवल (Revival) की पेचीदगियों, हेल्थ डिक्लेरेशन (Health Declaration) और नए कवर की बढ़ती लागत को समझना पॉलिसीधारकों के लिए बेहद ज़रूरी है।

क्या होता है जब प्रीमियम छूट जाता है?

भारत में, जब आप लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान चूक जाते हैं, तो पॉलिसी तुरंत बंद नहीं होती है। बीमा कंपनियां आमतौर पर एक ग्रेस पीरियड (Grace Period) देती हैं, जो एक तरह की राहत अवधि होती है। यदि आपकी पॉलिसी में मासिक भुगतान की व्यवस्था है, तो यह ग्रेस पीरियड आम तौर पर 15 दिन का होता है। वहीं, अगर आप तिमाही, छमाही या सालाना भुगतान करते हैं, तो आपको 30 दिन का ग्रेस पीरियड मिल सकता है। इस अवधि के दौरान, आपकी इंश्योरेंस कवरेज पूरी तरह से सक्रिय रहती है, और कोई भी क्लेम (Claim) आने पर उसका भुगतान सामान्य रूप से किया जाता है, जिसमें बकाया प्रीमियम काटकर भुगतान किया जाता है।

लैप्स पॉलिसी का अंजाम

अगर ग्रेस पीरियड खत्म होने तक भी प्रीमियम का भुगतान नहीं किया जाता है, तो पॉलिसी को आधिकारिक तौर पर 'लैप्स' (Lapsed) घोषित कर दिया जाता है। यह पॉलिसीधारकों के लिए एक गंभीर स्थिति है। खासकर प्योर टर्म इंश्योरेंस प्लान (Pure Term Insurance Plan) के मामले में, पॉलिसी लैप्स होने का मतलब है कि कवर पूरी तरह से समाप्त हो गया है और आपकी पूरी वित्तीय सुरक्षा खत्म हो गई है। एंडोमेंट (Endowment) या मनी-बैक (Money-back) प्लान के विपरीत, जिनमें पॉलिसी कुछ स्तर तक पहुंचने के बाद कुछ कम फायदे दे सकती है, टर्म प्लान में कोई बचत का घटक नहीं होता, इसलिए कवरेज का नुकसान पूरी तरह से होता है।

रिवाइवल की गारंटी क्यों नहीं?

कई पॉलिसीधारक सोचते हैं कि लैप्स हुई पॉलिसी को बकाया प्रीमियम और कुछ पेनल्टी (Penalty) देकर आसानी से फिर से शुरू किया जा सकता है। हालांकि, पॉलिसी रिवाइवल अक्सर संभव होता है, लेकिन यह आपका अधिकार नहीं है। बीमा कंपनियां रिवाइवल के लिए एक नया जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) करती हैं। यदि पॉलिसी लैप्स हुए काफी समय बीत चुका है, तो बीमाकर्ता आपसे नया हेल्थ डिक्लेरेशन (Health Declaration) या नए मेडिकल टेस्ट की मांग कर सकता है। अगर पॉलिसीधारक ने पॉलिसी निष्क्रिय रहने के दौरान कोई स्वास्थ्य समस्या विकसित कर ली है, तो बीमा कंपनी रिवाइवल को अस्वीकार कर सकती है या सख्त शर्तें लगा सकती है।

नया कवर खरीदने का जोखिम

जिन लोगों की पॉलिसी रिवाइव नहीं हो पाती, उनके लिए सबसे बड़ा वित्तीय जोखिम एक नया इंश्योरेंस प्लान लेना होता है। जीवन के बाद के पड़ाव पर खोए हुए कवरेज को बदलना अक्सर महंगा पड़ता है। जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, नए लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम बढ़ता जाता है। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति को कोई मेडिकल कंडीशन हो जाती है, तो उन्हें प्रीमियम के लिए अधिक भुगतान करना पड़ सकता है या बीमा कंपनियों से अस्वीकृति का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि वित्तीय योजना (Financial Planning) में, मौजूदा पॉलिसियों को बनाए रखना, यहां तक कि अल्पकालिक वित्तीय तनाव के दौरान भी, एक महत्वपूर्ण बिंदु है।

रेगुलेटर और पर्सिस्टेंसी का संदर्भ

भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) बीमा कंपनियों के पर्सिस्टेंसी रेशियो (Persistency Ratio) पर कड़ी नजर रखता है। उच्च पर्सिस्टेंसी रेशियो का मतलब है कि बड़ी संख्या में पॉलिसीधारक अपने प्रीमियम का भुगतान जारी रखते हैं और अपनी पॉलिसियों को सक्रिय रखते हैं। बीमा कंपनियों के लिए, पॉलिसी लैप्स होना प्रदर्शन का एक नकारात्मक संकेतक है। नतीजतन, कंपनियां अक्सर यह सुनिश्चित करने के लिए एसएमएस, ईमेल और डाक द्वारा कई रिमाइंडर भेजती हैं कि पॉलिसीधारकों को उनके भुगतान की नियत तारीखों के बारे में पता हो और वे साधारण चूक या ऑटो-डेबिट (Auto-debit) मैकेनिज्म की विफलता के कारण होने वाले आकस्मिक लैप्स से बच सकें।

निवेशक और पॉलिसीधारक क्या ट्रैक करें?

वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, पॉलिसीधारकों को प्रीमियम भुगतान को प्राथमिकता देनी चाहिए। समय पर सूचनाएं प्राप्त करने के लिए बीमाकर्ता के साथ संपर्क जानकारी, जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल एड्रेस, को अपडेट रखना आवश्यक है। जो लोग ऑटो-डेबिट सेवाओं का उपयोग करते हैं, उनके लिए यह निगरानी करना सहायक होता है कि हर महीने या साल में भुगतान सफलतापूर्वक हो रहा है या नहीं। यदि कोई पॉलिसी लैप्स हो जाती है, तो कवरेज को बहाल करने के लिए आवश्यक विशिष्ट रिवाइवल समय-सीमा और दस्तावेज़ीकरण को समझने के लिए बीमाकर्ता के साथ तुरंत संपर्क करने की सलाह दी जाती है।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.