ज्यादातर यात्री ट्रैवल इंश्योरेंस को केवल वीजा की औपचारिकता मानते हैं, लेकिन पॉलिसी के 'फाइन प्रिंट' को नजरअंदाज करना आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकता है। सब-लिमिट्स, उम्र की शर्तें और डिले ट्रिगर्स की अनदेखी मेडिकल इमरजेंसी के वक्त आपकी जेब खाली करवा सकती है।
भारत में कई ट्रैवलर्स इंश्योरेंस को ट्रिप प्लानिंग का सबसे आखिरी और जल्दबाजी वाला काम समझते हैं। लेकिन केवल 'सम इंश्योर्ड' (Sum Insured) की बड़ी राशि देखकर पॉलिसी चुनना एक बहुत बड़ी गलती साबित हो सकती है। मेडिकल इमरजेंसी या सफर में बाधा आने पर क्लेम मिलना या न मिलना अक्सर पॉलिसी के उन बारीक शब्दों (Fine Print) पर निर्भर करता है, जिन्हें हम पढ़ते ही नहीं हैं।
सब-लिमिट का जाल
बीमा कंपनियों और ग्राहकों के बीच विवाद की सबसे बड़ी वजह 'सब-लिमिट्स' होती हैं। आपकी पॉलिसी भले ही $50,000 या $100,000 का कवर दिखाती हो, लेकिन यह पूरी रकम हर खर्च के लिए उपलब्ध नहीं होती। कंपनियां अस्पताल के कमरे का किराया, आईसीयू (ICU) चार्ज और सर्जरी जैसी चीजों पर कैप लगा देती हैं। यदि आप विदेश में किसी महंगे अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो पॉलिसी की लिमिट वहां के खर्चों के मुकाबले बहुत कम हो सकती है, और बाकी का भारी-भरकम बिल आपको अपनी जेब से देना पड़ सकता है।
उम्र और हेल्थ की शर्तें
ट्रैवल इंश्योरेंस मार्केट में उम्र का खास ध्यान रखा जाता है। 50 या 60 साल की उम्र पार करते ही पॉलिसियों में शर्तें सख्त हो जाती हैं। इसमें कवरेज लिमिट कम होना, डायग्नोस्टिक्स के लिए ज्यादा डिडक्टिबल और सर्जरी के लिए को-पेमेंट जैसे नियम जुड़ जाते हैं। वहीं, पहले से मौजूद बीमारियों (Pre-existing conditions) को लेकर भी काफी कन्फ्यूजन रहता है। ज्यादातर बेसिक प्लान्स इन्हें कवर नहीं करते या फिर इनके लिए लंबा वेटिंग पीरियड रखते हैं।
क्रेडिट कार्ड इंश्योरेंस बनाम डेडिकेटेड पॉलिसी
फ्लाइट डिले या कैंसिलेशन का क्लेम हर हाल में नहीं मिलता, यह मौसम की खराबी या तकनीकी खामी जैसी विशिष्ट शर्तों पर टिका होता है। बहुत से यात्री अपने प्रीमियम क्रेडिट कार्ड से मिलने वाले कॉम्प्लीमेंट्री इंश्योरेंस पर भरोसा करते हैं, लेकिन ये अक्सर ट्रिप-स्पेसिफिक पॉलिसी के मुकाबले काफी कमजोर होते हैं। एडवेंचर स्पोर्ट्स या खास तरह की यात्राओं के लिए ये क्रेडिट कार्ड प्लान्स अपर्याप्त हो सकते हैं। इसलिए, किसी भी ट्रिप पर निकलने से पहले अपनी जरूरतों के हिसाब से एक डेडिकेटेड इंश्योरेंस प्लान चुनना ही समझदारी है।
