सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में मोटर इंश्योरेंस फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए सभी राज्यों को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। अब इंश्योरेंस कंपनियों को संदिग्ध दावों की रिपोर्टिंग के मामले में अधिक जवाबदेही बरतनी होगी।
धोखाधड़ी पर लगाम लगाने की कवायद
सुप्रीम कोर्ट ने एक सख्त रुख अपनाते हुए सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे मोटर एक्सीडेंट इंश्योरेंस क्लेम में हो रही धांधली को रोकने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन करें। यह फैसला Oriental Insurance Company जैसे मामलों की सुनवाई के दौरान लिया गया, जहां संगठित गिरोहों द्वारा इंश्योरेंस सिस्टम का गलत फायदा उठाया जा रहा था।
जांच में सामने आया है कि एक ही गाड़ी का उपयोग अलग-अलग राज्यों में बार-बार फर्जी दुर्घटना के दावे करने के लिए किया जा रहा है। अब राज्य-स्तरीय SIT के गठन से इन मामलों की जांच में तालमेल बेहतर होगा और एक मजबूत मैकेनिज्म तैयार होगा।
कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ी
अदालत ने इंश्योरेंस कंपनियों को कड़ी चेतावनी दी है कि वे संदिग्ध क्लेम की रिपोर्टिंग में 'चुनिंदा' रवैया न अपनाएं। अगर इंटरनल रिव्यू में यह पाया गया कि कंपनियों ने संदिग्ध गतिविधियों को दबाया है, तो उनकी मैनेजमेंट सीधे तौर पर जवाबदेह होगी। अब कंपनियों को किसी भी 'रेड फ्लैग' वाले क्लेम को सीधे संबंधित राज्य की SIT को फॉरवर्ड करना अनिवार्य होगा।
सेक्टर पर क्या होगा असर?
इंश्योरेंस सेक्टर के लिए यह कदम अल्पकाल में थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कंपनियों को अपने इंटरनल फ्रॉड-डिटेक्शन सिस्टम को मजबूत करने और VAHAN एवं e-DAR जैसे डेटाबेस के साथ क्लेम को क्रॉस-वेरिफाई करने के लिए एक्स्ट्रा खर्च करना पड़ सकता है।
हालांकि, लंबे समय में इससे कंपनियों का 'क्लेम रेशियो' सुधरेगा, जो प्रॉफिटेबिलिटी का एक प्रमुख पैमाना है। फर्जी दावों में कमी आने से इंश्योरेंस पूल की सेहत सुधरेगी, जिससे आम ग्राहकों के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम को तर्कसंगत बनाने में भी मदद मिल सकती है।
मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर, 2026 को तय की गई है, जिसमें IRDAI, वित्त मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करेंगे।
