Star Health and Allied Insurance ने वितीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट **25%** बढ़कर **₹550 करोड़** हो गया है। रिटेल प्रीमियम में ज़बरदस्त ग्रोथ और बेहतर अंडरराइटिंग परफॉर्मेंस इस उछाल के पीछे की मुख्य वजहें हैं।
रिटेल प्रीमियम में बंपर ग्रोथ, GWP 19% बढ़ा
Star Health ने वितीय वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार तरीके से की है। जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 25% बढ़कर ₹550 करोड़ दर्ज किया गया। यह शानदार प्रदर्शन कंपनी के ग्रॉस रिटन प्रीमियम (GWP) में 19% की सालाना बढ़ोतरी की बदौलत संभव हुआ, जो ₹4,287 करोड़ तक पहुंच गया। खास बात यह है कि रिटेल हेल्थ सेगमेंट में ताज़ा प्रीमियम 37% उछलकर ₹730 करोड़ रहा, जो कंपनी के अपने मुख्य रिटेल कारोबार पर फोकस को दर्शाता है।
अंडरराइटिंग में सुधार और डिजिटल पहुंच
मुनाफे में इस बड़ी बढ़ोतरी की एक और अहम वजह कंपनी का अंडरराइटिंग प्रॉफिट रहा। Q1 FY27 में यह बढ़कर ₹111 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह सिर्फ ₹16 करोड़ था। इससे पता चलता है कि कंपनी अपने इंश्योरेंस रिस्क को कहीं ज़्यादा कुशलता से मैनेज कर रही है। इसके अलावा, इन्वेस्टमेंट इनकम में बढ़ोतरी ने भी कंपनी के इंश्योरेंस ऑपरेशंस के साथ मिलकर प्रॉफिट बढ़ाने में मदद की।
Star Health अपनी सेल्स बढ़ाने के लिए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर लगातार भरोसा कर रही है। इसी तिमाही में 97% ताज़ा पॉलिसियां डिजिटल चैनलों से ही ली गईं। कंपनी का डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर डिजिटल प्लेटफॉर्म 142% की रफ्तार से बढ़ा है और अब कुल ताज़ा रिटेल बिक्री में 16% का योगदान दे रहा है। मैनेजमेंट ने बताया कि इन सुधारों का असर क्लेम सेटलमेंट में भी दिख रहा है, जहां 90% क्लेम एक घंटे के भीतर अप्रूव हो रहे हैं।
आगे की राह: क्या यह रफ़्तार बनी रहेगी?
हालांकि Q1 के नतीजे शानदार हैं, लेकिन निवेशकों की नज़र इस बात पर रहेगी कि क्या कंपनी स्वास्थ्य बीमा सेक्टर की कड़ी प्रतिस्पर्धा और मूल्य निर्धारण के दबाव के बीच इन मुनाफे के मार्जिन को बनाए रख पाती है। FY27 के लिए कंपनी ने ₹24,000 करोड़ का GWP टारगेट रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रिटेल ग्रोथ की मौजूदा गति को बनाए रखना और क्लेम रेश्यो को नियंत्रित करना ज़रूरी होगा, जो इस तिमाही में 91% रहा।
स्वास्थ्य बीमा उद्योग के पिछले ट्रेंड्स बताते हैं कि मेडिकल इन्फ्लेशन (बीमारी पर बढ़ता खर्च) और क्लेम की बढ़ती संख्या अक्सर प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव डाल सकती है, अगर इसे प्राइसिंग और ऑपरेशनल कंट्रोल से मैनेज न किया जाए। कंपनी के नेट प्रमोटर स्कोर (NPS) का 65 तक पहुंचना और बेहतर पर्सिस्टेंसी रेट्स (पॉलिसी जारी रहने की दर) सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन लंबी अवधि में क्लेम मैनेजमेंट और डिजिटल सेल्स मॉडल को सफलतापूर्वक बढ़ाने की क्षमता ही सफलता तय करेगी।
