निवेशकों से क्यों मिलेंगे Star Health के अधिकारी?
Star Health and Allied Insurance Co. Ltd. ने अपनी आने वाली चालों को लेकर निवेशकों को भरोसा दिलाने की तैयारी कर ली है। कंपनी ने 25 फरवरी 2026 को मुंबई में एनालिस्ट्स और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के साथ एक ग्रुप मीटिंग रखी है, जो IIFL कॉन्फ्रेंस का हिस्सा होगी। यह मीटिंग इसलिए अहम है क्योंकि हाल ही में कंपनी के Q3 FY26 के फाइनेंशियल रिजल्ट्स आए हैं, जिनमें कुछ चिंताजनक बातें हैं।
नतीजों में दिखा उतार-चढ़ाव
Indian GAAP के तहत, Star Health के नेट प्रॉफिट में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 40% की गिरावट आई है, जो अब ₹128 करोड़ रह गया है। वहीं, Ind AS (इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स) के तहत कंपनी के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स में 415% से भी ज्यादा का जोरदार उछाल देखा गया और यह ₹449 करोड़ पर पहुंच गया। इस अंतर की वजह अलग-अलग अकाउंटिंग तरीकों से रेवेन्यू और खर्चों को दर्ज करना है, जिस पर निवेशक मीटिंग में सवाल पूछ सकते हैं।
इसके बावजूद, कंपनी के ग्रॉस रिटन प्रीमियम (GWP) में 22% की सालाना वृद्धि दर्ज हुई और यह ₹4,624 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में भी सुधार हुआ है। लॉस रेश्यो घटकर 68.9% और एक्सपेंस रेश्यो घटकर 29.9% पर आ गया, जिससे कंबाइंड इंश्योरेंस सर्विस रेश्यो 98.8% हो गया।
पिछले नौ महीनों (9MFY26) की बात करें तो नेट प्रॉफिट ₹966 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹516 करोड़ से काफी ज्यादा है।
बिजनेस स्ट्रैटेजी में बड़े बदलाव
Star Health अपनी बिजनेस स्ट्रैटेजी को लगातार बेहतर बना रही है। कंपनी ने प्रॉफिटेबल सेगमेंट्स पर फोकस किया है, जिसके चलते SME बिजनेस अब कॉर्पोरेट चैनल का 65% हिस्सा बन गया है, जो पहले सिर्फ 40% था। कंपनी ने घाटे वाले बड़े कॉर्पोरेट और को-इंश्योरेंस सेगमेंट्स से बाहर निकलने का भी फैसला किया है। साथ ही, कंपनी ने अपने 65% पोर्टफोलियो वाले छह रिटेल प्रोडक्ट्स की कीमतों में भी बदलाव किया है और अब सालाना प्राइसिंग स्ट्रैटेजी अपनाने की योजना है। AI-पावर्ड प्लेटफॉर्म्स के जरिए कस्टमर एक्सपीरियंस और क्लेम मैनेजमेंट को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
Star Health रिटेल हेल्थ सेगमेंट में अपनी लीडरशिप बनाए हुए है, जिसका मार्केट शेयर FY25 और 9MFY26 दोनों में 33% रहा। भारत में हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में बढ़ती हेल्थ अवेयरनेस और खर्चों के चलते अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है।
चिंताएं और पिछला रिकॉर्ड
हालांकि Star Health मार्केट में एक बड़ा प्लेयर है, लेकिन इसे कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में, जुलाई 2025 में, इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने डेटा और साइबर सिक्योरिटी गाइडलाइंस के उल्लंघन के मामले में Star Health पर ₹3.39 करोड़ का जुर्माना लगाया था और चेतावनी भी जारी की थी। यह सब एक बड़े साइबर अटैक के बाद हुआ था, जिसमें कस्टमर डेटा की सेंधमारी हुई थी। इससे कंपनी के डेटा प्रोटेक्शन उपायों पर सवाल उठते हैं।
कुछ एनालिस्ट्स ने 'वीक H1FY25 प्रिंट' और 'सब-ऑप्टिमल प्रॉफिटेबिलिटी' जैसी समस्याओं का भी जिक्र किया है, जिसका कारण बढ़ा हुआ क्लेम रेश्यो (70% in H1FY25) और रिटेल हेल्थ मार्केट शेयर में मामूली गिरावट है। इसके अलावा, पुरानी पॉलिसी पोर्टफोलियो से भी क्लेम की गंभीरता और आवृत्ति बढ़ने का खतरा बना रहता है। कंपनी का सॉल्वेंसी रेश्यो 214% है, जो पिछले साल के 222% से थोड़ा कम हुआ है।
आगे क्या?
निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि Star Health इन चुनौतियों से कैसे निपटती है। खासकर, GAAP के तहत प्रॉफिटेबिलिटी, पेनल्टी के बाद साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करना और क्लेम लागत को प्रभावी ढंग से मैनेज करने की कंपनी की रणनीति अहम होगी। कंपनी की प्रीमियम ग्रोथ बनाए रखने और कॉम्पिटिटिव मार्केट में रिटेल हेल्थ सेगमेंट में अपनी लीडरशिप बरकरार रखने की क्षमता महत्वपूर्ण साबित होगी।