फैमिली फ्लोटर प्लान्स की सीमाएं
भारत में बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी खर्चे एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। लगातार बढ़ती मेडिकल इन्फ्लेशन, जो 2026 तक 11.5% और कुछ अनुमानों के अनुसार 14% तक पहुँच सकती है, के कारण पारंपरिक फैमिली फ्लोटर प्लान्स बुजुर्गों की ज़रूरतों के लिए अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। इन प्लान्स में प्रीमियम सबसे बड़े सदस्य की उम्र पर आधारित होता है, जिससे उम्र बढ़ने के साथ प्रीमियम बहुत बढ़ जाता है। इससे भी बड़ी समस्या यह है कि माता-पिता के किसी बड़े इलाज में सारा 'सम इंस्योर्ड' (Sum Insured) जल्दी खत्म हो सकता है, जिससे परिवार के युवा सदस्यों के लिए कवरेज खतरे में पड़ जाता है। इसी को देखते हुए, अब सलाहकार भी जोखिम को अलग-अलग करने की सलाह दे रहे हैं, ताकि पूरे परिवार का कवर सुरक्षित रहे।
रेगुलेटरी बदलावों का मिला सहारा
भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के कड़े नियमों और सुधारों ने स्टैंडअलोन सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस प्लान्स को काफी बढ़ावा दिया है। IRDAI ने नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के लिए उम्र की ऊपरी सीमा को हटा दिया है, जिससे किसी भी उम्र का व्यक्ति अब कवर ले सकता है। इसके अलावा, पहले से मौजूद बीमारियों (Pre-existing Diseases) के लिए 'वेटिंग पीरियड' (Waiting Period) को घटाकर तीन साल कर दिया गया है, जिससे ये बीमारियाँ कवर होना जल्दी शुरू हो जाती हैं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana - AB-PMJAY) के तहत 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों को, उनकी आय की परवाह किए बिना, सालाना ₹5 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य कवरेज भी मिल रहा है। ये कदम स्वास्थ्य सेवाओं को सभी के लिए सुलभ बना रहे हैं और इंश्योरेंस कंपनियों को बेहतर सुविधाएँ वाले खास प्लान्स लाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
टैक्स बचत और दूरदर्शिता का फायदा
जो बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का भुगतान करते हैं, उन्हें न केवल बेहतर सुरक्षा मिलती है, बल्कि टैक्स में भी अच्छी-खासी बचत होती है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80D के तहत, 60 साल से अधिक उम्र के माता-पिता के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर ₹50,000 तक की टैक्स कटौती का लाभ उठाया जा सकता है (अगर पॉलिसीधारक खुद वरिष्ठ नागरिक है तो यह सीमा ₹50,000 है)। जल्दी पॉलिसी खरीदने का एक और फायदा यह है कि जब माता-पिता स्वस्थ होते हैं, तो अंडरराइटिंग (Underwriting) आसान होती है, 'वेटिंग पीरियड' जल्दी खत्म हो जाते हैं, और भविष्य में स्वास्थ्य समस्याएं आने पर प्रीमियम कम रहता है।
अनदेखे खतरे: स्टैंडअलोन प्लान्स क्यों जरूरी?
सिर्फ फैमिली फ्लोटर प्लान्स पर निर्भर रहने में कुछ बड़े जोखिम छिपे हैं। बुजुर्गों के लिए ज़रूरी खास कवर, जैसे कि क्रोनिक बीमारियों (Chronic Illnesses) या डोमिसाइलियरी केयर (Domiciliary Care) के लिए व्यापक सुरक्षा, अक्सर इन प्लान्स में या तो शामिल नहीं होती या फिर उन पर सब-लिमिट (Sub-limits) या को-पेमेंट (Co-payment) लगा दिया जाता है। मेडिकल इन्फ्लेशन के कारण जो 'सम इंस्योर्ड' आज पर्याप्त लगता है, वह कुछ सालों में कम पड़ सकता है। इसके अलावा, अगर क्लेम के समय किसी पुरानी बीमारी का ठीक से खुलासा न हो, तो क्लेम रिजेक्ट भी हो सकता है, या प्रीमियम बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।
बाज़ार का बदलता रुख
सीनियर सिटीजन्स के बीच हेल्थ इंश्योरेंस लेने का चलन तेजी से बढ़ा है। फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) में इसमें 60% की ग्रोथ देखी गई है, जो साफ दिखाता है कि लोग अब विशेष प्लान्स की ओर रुख कर रहे हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में स्टैंडअलोन सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस सबसे प्रमुख प्रोडक्ट कैटेगरी बन जाएगा। बच्चों द्वारा सीनियर पॉलिसीधारकों के लिए भुगतान किए जाने वाले लगभग 73% प्रीमियम से पता चलता है कि इन स्वतंत्र प्लान्स की मांग भविष्य में और बढ़ेगी।