SBI General Insurance ने फायर इंश्योरेंस में चल रहे आक्रामक डिस्काउंट के दौर से दूरी बना ली है। कंपनी अपने अंडरराइटिंग प्रॉफिट को बचाने के लिए बाजार हिस्सेदारी की कीमत पर भी अनुशासित रहना चाहती है। कंपनी ने Q1 FY27 में **₹426 करोड़** का मुनाफा कमाया है और अब सारा ध्यान हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट पर है, जिसे SBI की **23,000** से ज्यादा शाखाओं के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा।
बाजार की लड़ाई से दूरी क्यों?
जनरल इंश्योरेंस इंडस्ट्री में फिलहाल कई कंपनियां बिजनेस पाने के लिए 99% तक का डिस्काउंट दे रही हैं। हालांकि, SBI General ने इस दौड़ से खुद को बाहर रखा है। मैनेजमेंट का साफ कहना है कि वे बिना सोचे-समझे वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय मुनाफे (Underwriting discipline) पर ध्यान देंगे। इसी अनुशासन के चलते कंपनी के फायर इंश्योरेंस प्रीमियम में 36% की गिरावट आई है, जो पूरी इंडस्ट्री के 28% के औसत कॉन्ट्रैक्शन से कहीं ज्यादा है।
Q1 FY27 के वित्तीय आंकड़े
कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹426 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹456 करोड़ से थोड़ा कम है। इस गिरावट की वजह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रोविजनिंग और फसल बीमा (Crop receivables) से जुड़े एडजस्टमेंट्स रहे हैं। वहीं, कंपनी का ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम 10.9% बढ़कर ₹3,506 करोड़ पर पहुंच गया है। कंपनी Ind AS फ्रेमवर्क के तहत नतीजे पेश करने वाली पहली जनरल इंश्योरेंस फर्म बन गई है, जिससे पारदर्शिता और बढ़ी है। इसके अलावा, कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो 2.0 है, जो रेगुलेटरी मानक 1.50 से काफी सुरक्षित स्थिति में है।
हेल्थ इंश्योरेंस पर बड़ा दांव
फायर इंश्योरेंस में मार्जिन पर दबाव को देखते हुए अब कंपनी अपनी ग्रोथ के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पर दांव लगा रही है। इसके लिए State Bank of India के 23,000 से ज्यादा ब्रांच नेटवर्क का भरपूर उपयोग किया जाएगा ताकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भी पहुंच बनाई जा सके।
आगे की चुनौतियां
निवेशकों के लिए 1 अक्टूबर का रिन्यूअल साइकिल काफी महत्वपूर्ण है, जो तय करेगा कि मार्केट में प्राइसिंग कितनी स्टेबल होती है। कंपनी का आईपीओ (IPO) लाने का लक्ष्य अभी भी लंबे समय की योजना है, फिलहाल प्राथमिकता सर्विस क्वालिटी और ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को सुधारना है।
