क्या आप जानते हैं कि बीमा कंपनियों के पास फरवरी 2026 तक पॉलिसीधारकों का लगभग **9,000 करोड़ रुपये** का क्लेम दबा पड़ा है? यह पैसा उन लोगों का है जो या तो अपनी पॉलिसी के बारे में नहीं जानते या फिर क्लेम करने की प्रक्रिया से अनजान हैं। IRDAI का 'बीमा भरोसा' पोर्टल आपकी मदद कर सकता है।
लावारिस क्यों पड़ा बीमा का पैसा?
28 फरवरी 2026 तक, भारत की बीमा कंपनियों के पास ₹8,973.89 करोड़ की एक भारी-भरकम रकम लावारिस पड़ी हुई है। ये वो क्लेम हैं जिनका भुगतान तय तारीख से 12 महीने बाद भी नहीं हुआ है। इसमें मैच्योरिटी की रकम, मृत्यु क्लेम, सर्वाइवल बेनिफिट्स और प्रीमियम रिफंड शामिल हैं, जिन्हें पॉलिसीधारक या उनके नॉमिनी ने आज तक नहीं लिया है।
आखिर क्यों लावारिस हो जाती है रकम?
बीमा पॉलिसियां, खासकर जीवन बीमा की पारंपरिक योजनाएं, अक्सर दशकों तक चलती हैं। इस दौरान, पॉलिसीधारक अपना पता, फोन नंबर या बैंक डिटेल्स बदल लेते हैं, लेकिन बीमा कंपनी को इसकी जानकारी नहीं देते। कई बार ऐसा भी होता है कि पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद परिवार को पता ही नहीं चलता कि कोई पॉलिसी मौजूद भी थी, खासकर अगर ज़रूरी कागज़ात ठीक से न रखे गए हों। नॉमिनी का नाम ठीक से दर्ज न होना या क्लेम के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स का अधूरा होना भी इसके आम कारण हैं। जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस में, हॉस्पिटल का खर्च या किसी दुर्घटना के बाद क्लेम प्रोसेस के लिए ज़रूरी फाइनल डॉक्यूमेंट्स जमा न करने पर भी पैसा लावारिस रह जाता है।
लावारिस फंड पर सरकारी नियम
कोई भी बीमा क्लेम, अगर तय तारीख से 12 महीने के अंदर नहीं लिया जाता, तो उसे लावारिस (Unclaimed) माना जाता है। बीमा कंपनियां इस रकम को अपनी बैलेंस शीट में देनदारी (Liability) के तौर पर दिखाती हैं।
अगर यह पैसा 10 साल तक भी लावारिस रहता है, तो इसे सरकार के सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि इसके बाद भी पॉलिसीधारक या उसके कानूनी वारिस का उस पैसे पर हक़ बना रहता है। वे ट्रांसफर के 25 साल बाद तक भी इस रकम को क्लेम कर सकते हैं।
अपना पैसा कैसे खोजें और क्लेम करें?
यह पता लगाने के लिए कि क्या आपके या आपके परिवार के किसी सदस्य का कोई बीमा क्लेम लावारिस पड़ा है, आप सीधे बीमा कंपनियों की वेबसाइट पर जा सकते हैं। ज़्यादातर बड़ी बीमा कंपनियां अपनी वेबसाइट पर 'Unclaimed Amount' सेक्शन देती हैं, जहाँ आप नाम, जन्मतिथि, पैन या पुरानी पॉलिसी नंबर से सर्च कर सकते हैं।
इसके अलावा, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने 'बीमा भरोसा' (Bima Bharosa) नाम का एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल भी लॉन्च किया है। इस पोर्टल पर सभी रजिस्टर्ड लाइफ और जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के सर्च पेज के डायरेक्ट लिंक दिए गए हैं, जिससे अलग-अलग कंपनियों में पैसा खोजना आसान हो जाता है।
जब आपको अपना क्लेम मिल जाए, तो उसे प्रोसेस करने के लिए आपको KYC डॉक्यूमेंट्स, बैंक अकाउंट की डिटेल्स और अपने हक़ का सबूत (जैसे नॉमिनी रिकॉर्ड या कानूनी वारिस का सर्टिफिकेट) जमा करना होगा।
भविष्य में ऐसी परेशानी से कैसे बचें?
अपने बीमा क्लेम को लावारिस होने से बचाना, बाद में उसे वापस पाने की कोशिश करने से कहीं ज़्यादा आसान है। इसलिए, यह ज़रूरी है कि पॉलिसीधारक अपने परिवार को अपनी सभी पॉलिसियों के बारे में जानकारी दें। समय-समय पर नॉमिनी की डिटेल्स, बैंक अकाउंट की जानकारी और अपना पता अपडेट करते रहें। अपनी बीमा पॉलिसी के सभी कागज़ात को संभाल कर रखें और उन्हें अपने पैन और आधार से लिंक करवाएं, ताकि भविष्य में आपके परिवार को इन पैसों को खोजने में आसानी हो।
