इन्शुरटेक स्टार्टअप Plum अब अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इंश्योरेंस कमीशन स्ट्रक्चर में होने वाले संभावित बदलावों को देखते हुए कंपनी अब नॉन-इंश्योरेंस हेल्थकेयर सर्विसेज पर ज्यादा फोकस करेगी। अभी कंपनी का **75%** रेवेन्यू ब्रोकरेज से आता है, जबकि **25%** वेलनेस प्रोडक्ट्स से। को-फाउंडर अभिषेक पोद्दार ने फिलहाल IPO की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
भारतीय एम्प्लॉई हेल्थ बेनिफिट्स प्लेटफॉर्म Plum Insurance अब अपने बिजनेस की दिशा बदल रही है। कंपनी अभी अपने कुल रेवेन्यू का करीब 75% हिस्सा इंश्योरेंस ब्रोकरेज से जुटाती है, लेकिन अब वह नॉन-इंश्योरेंस हेल्थकेयर सर्विसेज में अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी में है। यह कदम एक एहतियात के तौर पर उठाया जा रहा है क्योंकि भविष्य में इंश्योरेंस कमीशन स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
हेल्थकेयर का 'सेफ-बफर'
फिलहाल, कंपनी का 25% रेवेन्यू टेलीहेल्थ कंसल्टेशन, मेंटल हेल्थ सपोर्ट और एनुअल हेल्थ चेक-अप जैसे प्रोडक्ट्स से आता है। यह हिस्सा कंपनी के लिए एक मजबूत 'बफर' की तरह काम कर रहा है, जो भविष्य में रेग्युलेटरी बदलावों के असर को कम करने में मदद करेगा।
डेटा में क्या है खास?
Plum की इंटरनल रिसर्च के मुताबिक, महज 5% कर्मचारी ही कंपनी के कुल मेडिकल क्लेम्स के 88% हिस्से के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन क्लेम्स की मुख्य वजह क्रोनिक बीमारियां हैं। कंपनी अब वेलनेस सर्विसेज पर जोर देकर कंपनियों को इंश्योरेंस क्लेम्स कम करने और हेल्थ इंटरवेंशन पर फोकस करने में मदद करना चाहती है।
मार्केट का हाल और ग्रोथ
पिछले तीन सालों में एम्प्लॉई हेल्थ बेनिफिट्स पर खर्च 14.7% की CAGR से बढ़ा है। हालांकि, मेडिकल इन्फ्लेशन भी 13% से 14% के बीच बनी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय कंपनियां अभी अपने पेरोल का केवल 0.8% से 1.2% ही इन बेनिफिट्स पर खर्च करती हैं, जबकि ग्लोबल बेंचमार्क 7% से ऊपर है।
कंपनी ने साफ किया है कि अभी वे IPO लाने की जल्दी में नहीं हैं, क्योंकि अभी वे अपनी ग्रोथ फेज में हैं और प्लेटफॉर्म को और स्केल करने पर ध्यान दे रहे हैं।
