26 अगस्त 2026 को आए ग्लेशियर के मलबे और बाढ़ ने नेपाल के पावर सेक्टर को हिलाकर रख दिया है। इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए भारी नुकसान के कारण **25.87 अरब NPR** का इंश्योरेंस क्लेम आया है, जिससे Oriental Insurance समेत कई बैंकों और डेवलपर्स पर दबाव बढ़ गया है।
तबाही का दायरा
नेपाल के लांगटांग नेशनल पार्क (Langtang National Park) के पास ग्लेशियर फटने की घटना से हाइड्रोपावर सेक्टर एक बड़े वित्तीय संकट से गुजर रहा है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, कुल इंश्योरेंस क्लेम 25.87 अरब NPR तक पहुंच चुके हैं। इसमें इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन पॉलिसी से जुड़े क्लेम 20 अरब NPR के पार निकल गए हैं। रासुवागढ़ी (Rasuwagadhi), अपर त्रिशूली-3A और चिलिमे जैसे बड़े पावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे कामकाज पूरी तरह ठप है। रिकंस्ट्रक्शन का कुल खर्च 4 अरब डॉलर से 5 अरब डॉलर के बीच आंका जा रहा है, जो नेपाल की जीडीपी का लगभग 10% है।
Oriental Insurance के सामने बड़ी चुनौती
इस आपदा का सीधा असर भारतीय बाजार की दिग्गज कंपनी Oriental Insurance पर पड़ता दिख रहा है। नेपाल की 15 नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों में से Oriental Insurance पर 13.04 अरब NPR का क्लेम दायित्व आया है, जो कुल मार्केट क्लेम का आधे से भी अधिक है। इस घटना के बाद अब इंटरनेशनल री-इंश्योरर्स हिमालयी क्षेत्रों के प्रोजेक्ट्स के लिए अपनी अंडरराइटिंग पॉलिसी को सख्त कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम
यह घटना केवल इंश्योरेंस सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकों के लिए भी 'सिस्टमिक रिस्क' का कारण बन गई है जिन्होंने इन प्रोजेक्ट्स को बड़ा कर्ज दे रखा है। Nepal Stock Exchange (NEPSE) में हाइड्रो और इंश्योरेंस इंडेक्स में गिरावट देखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि अब हिमालयी बेल्ट के प्रोजेक्ट्स के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ सकता है, जो डेवलपर्स के प्रॉफिट मार्जिन को सीधा चोट पहुंचाएगा। भविष्य में प्रोजेक्ट्स में देरी होने पर 'रेवेन्यू लॉस क्लॉज' सक्रिय हो सकते हैं, जिससे वित्तीय स्थिति और जटिल हो सकती है।
