NBFCs की IRDAI से बड़ी मांग: इंश्योरेंस कमीशन पर नियमों में ढील और 5 साल का समय मांगा

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AuthorAditya Rao|Published at:
NBFCs की IRDAI से बड़ी मांग: इंश्योरेंस कमीशन पर नियमों में ढील और 5 साल का समय मांगा

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) ने इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI के सामने एक बड़ी मांग रखी है। इंडस्ट्री बॉडी FIDC का कहना है कि इंश्योरेंस कमीशन पर प्रस्तावित कैप, यानी क्रेडिट लाइफ के लिए **2%** और हेल्थ के लिए **5%** की सीमा, बहुत सख्त है। इसे लागू करने के लिए NBFCs ने **5 साल** के ट्रांजिशन पीरियड की मांग की है।

कमीशन में कटौती का विवाद

फिलहाल, कई NBFCs इन इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर 45% से लेकर 49% तक कमीशन कमाते हैं। रेगुलेटर के नए प्रस्तावों के बाद यह घटकर सीधे 2% और 5% के स्तर पर आने की संभावना है। कई उधारदाताओं के लिए, इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस उनकी 'फी-बेस्ड रेवेन्यू' का एक बड़ा हिस्सा है, जो अब खतरे में दिख रहा है।

NBFCs का तर्क क्या है?

इंडस्ट्री का कहना है कि इंश्योरेंस बेचने की असल लागत प्रीमियम का करीब 32% है। इसमें फिजिकल ब्रांच नेटवर्क, स्टाफ की ट्रेनिंग और रेगुलेटरी नियमों का पालन शामिल है। NBFCs का दावा है कि अगर कमीशन को तुरंत इन नए स्तरों तक सीमित कर दिया गया, तो उनका डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस बंद होने की कगार पर आ जाएगा।

भविष्य का रोडमैप (Glide Path)

NBFCs अब रेगुलेटर से एक 'ग्लाइड पाथ' यानी धीरे-धीरे बदलाव करने की प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि कमीशन को 5 साल में 25% के टारगेट तक लाया जाए, न कि इसे तुरंत लागू किया जाए। साथ ही, वे यह अधिकार भी मांग रहे हैं कि उन्हें सीधे उधारकर्ताओं से प्रीमियम इकट्ठा करने की अनुमति मिले, जिससे कामकाज आसान हो सके।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

निवेशकों को अब उन NBFCs के नतीजों पर बारीक नजर रखनी होगी जो इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन में काफी सक्रिय हैं। केवल लोन ग्रोथ ही नहीं, बल्कि उनकी 'फी-बेस्ड इनकम' की स्थिरता भी शेयर की चाल तय करेगी। अगर IRDAI अपने प्रस्ताव पर कायम रहता है, तो इन कंपनियों को अपनी रेवेन्यू स्ट्रैटेजी और कॉस्ट स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.