भारत के शहरों में मॉनसून के दौरान जलभराव (Water logging) आम हो गया है। आपकी बेसिक कार इंश्योरेंस पॉलिसी हर नुकसान कवर नहीं करती, इसलिए जीरो डेप्रिसिएशन और इंजन प्रोटेक्शन जैसे 4 जरूरी एड-ऑन्स आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
भारत के शहरों में अब मॉनसून के दौरान जलभराव एक बड़ी मुसीबत बन चुका है। आम तौर पर लोग जो कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस लेते हैं, वह दुर्घटनाओं को तो कवर करता है, लेकिन पानी के कारण होने वाले नुकसान की बारीकियां उसमें अक्सर छूट जाती हैं। अगर आप सिर्फ बेसिक पॉलिसी पर निर्भर हैं, तो मॉनसून में रिपेयर का बिल आपके बजट को बिगाड़ सकता है।
जीरो डेप्रिसिएशन (Zero Depreciation): पार्ट्स का पूरा पैसा
आमतौर पर इंश्योरेंस कंपनियां प्लास्टिक, रबर और फाइबर के पार्ट्स पर डेप्रिसिएशन काटती हैं। अगर आप 'जीरो डेप्रिसिएशन' कवर लेते हैं, तो क्लेम के समय इन पार्ट्स की पूरी कीमत मिलती है। इसके लिए साल भर में महज ₹1,500 का अतिरिक्त प्रीमियम देकर आप महंगी रिपेयरिंग से बच सकते हैं।
रिटर्न टू इनवॉइस (RTI): टोटल लॉस से सुरक्षा
अगर कार पूरी तरह डैमेज हो जाए या चोरी हो जाए, तो आम पॉलिसी में केवल IDV (Insured Declared Value) मिलता है, जो कार की वास्तविक कीमत से काफी कम होता है। RTI कवर आपको कार की शोरूम वाली पूरी कीमत (टैक्स और रजिस्ट्रेशन समेत) दिलाता है। करीब ₹1,000 के मामूली खर्च में यह आपकी नई गाड़ी के लिए एक बड़ा फाइनेंशियल सुरक्षा कवच है।
इंजन प्रोटेक्शन (Engine Protection): सबसे अहम बचाव
पानी में गाड़ी बंद होने पर 'हाइड्रोस्टेटिक लॉक' (Hydrostatic lock) का खतरा होता है, जिससे इंजन बर्बाद हो सकता है। बेसिक इंश्योरेंस इसे कवर नहीं करता। ध्यान रहे, अगर पानी भरी सड़क पर आपने गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश की, तो क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा। इंजन प्रोटेक्शन कवर लेने पर रिपेयर का भारी खर्च इंश्योरेंस कंपनी उठाती है।
रोडसाइड असिस्टेंस (Roadside Assistance): सही मदद का सहारा
बाढ़ या जलभराव में गाड़ी को गलत तरीके से टो (Tow) करना नुकसान बढ़ा सकता है। रोडसाइड असिस्टेंस के जरिए आप ऑथराइज्ड सर्विस का लाभ ले सकते हैं। इसमें बैटरी जंप स्टार्ट और टोइंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जो मुश्किल वक्त में गाड़ी की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। भारी बारिश शुरू होने से पहले अपनी पॉलिसी चेक करें कि ये कवर उसमें शामिल हैं या नहीं।
