IFRS के नियमों पर LIC की देरी की अर्जी
लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) ने अपने बोर्ड की मंजूरी के बाद, नए इंटरनेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स (IFRS) को अपनाने में एक साल की मोहलत मांगी है। भारत के इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI (Insurance Regulatory and Development Authority of India) ने सभी बीमा कंपनियों के लिए 1 अप्रैल, 2026 तक इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स (Ind AS) को अपनाना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, IRDAI ने उन कंपनियों को एक साल की देरी की सुविधा दी है जिन्हें इसे लागू करने में चुनौतियां आ रही हैं। LIC ने इस देरी के लिए 30 अप्रैल, 2026 तक आवेदन करने की योजना बनाई है। इस फैसले से LIC कुछ हद तक अपने प्रतिस्पर्धियों से अलग दिख रही है, क्योंकि HDFC Life जैसी कंपनियां पहले ही IFRS 9 और IFRS 17 को अपना चुकी हैं। वहीं, ICICI Prudential Life भी इसी तरह की देरी की मांग कर सकती है। IFRS/Ind AS को अपनाने का मुख्य उद्देश्य भारतीय बीमा कंपनियों के वित्तीय रिपोर्टिंग को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप लाना, पारदर्शिता बढ़ाना और तुलनात्मकता को आसान बनाना है।
बोनस शेयर का बड़ा ऐलान
IFRS नियमों में देरी की अर्जी के साथ-साथ, LIC के बोर्ड ने एक और बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने अपने इतिहास में पहली बार, 2022 में लिस्टिंग के बाद, 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करने को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत, 31 दिसंबर, 2025 तक उपलब्ध रिजर्व्स से ₹6,325 करोड़ को कैपिटलाइज किया जाएगा। इससे कंपनी का पेड-अप शेयर कैपिटल लगभग दोगुना होकर ₹12,649.99 करोड़ हो जाएगा। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद, ये बोनस शेयर 12 जून, 2026 तक क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के CEO, आर. डोरायसामी ने कहा है कि यह शेयरधारकों को पुरस्कृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम शेयर बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) बढ़ाने और कंपनी की वित्तीय मजबूती (रिजर्व्स ₹1.5 लाख करोड़ के करीब) को दर्शाने में मदद करेगा।
स्टॉक में उछाल और एनालिस्ट की राय
IFRS में देरी की खबर के बावजूद, बोनस शेयर के ऐलान ने LIC के शेयर को रफ्तार दी। 15 अप्रैल, 2026 को LIC के शेयर में 3.74% से लेकर 4.24% तक का उछाल देखा गया। एनालिस्ट्स का भी LIC पर भरोसा बना हुआ है। ज्यादातर ब्रोकरेज हाउसेज ने 'Buy' की रेटिंग दी है और अगले 12 महीनों के लिए इसका औसत प्राइस टारगेट (Price Target) लगभग ₹1,048.58 रखा है, जो मौजूदा स्तर से 24% तक की तेजी का संकेत देता है।
देरी के संभावित जोखिम
हालांकि, IFRS नियमों को अपनाने में देरी LIC के लिए कुछ जोखिम भी पैदा कर सकती है। इससे पारदर्शिता और ग्लोबल पीयर्स के साथ तुलनात्मकता में कमी आ सकती है, जिससे खासकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए कंपनी का विश्लेषण करना मुश्किल हो सकता है।
भविष्य का आउटलुक
भारतीय जीवन बीमा क्षेत्र की बात करें तो, कम पेनिट्रेशन, बढ़ती जागरूकता और अफोर्डेबिलिटी के चलते अगले कुछ सालों में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। LIC अपनी मजबूत स्थिति, बड़े रिजर्व्स और अब बोनस शेयर के ऐलान के साथ निवेशकों की दिलचस्पी बनाए रखने में कामयाब रहेगी।