LIC के सिर पर एक और टैक्स का पहाड़
सरकारी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (LIC) को एक बड़े टैक्स डिमांड नोटिस का सामना करना पड़ा है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि उसे फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के लिए ₹10,331 करोड़ की टैक्स डिमांड मिली है। यह नोटिस इंटरिम बोनस (interim bonuses) के अमान्य होने, निगेटिव रिजर्व (negative reserves) और सेक्शन 80M के तहत कटौती (deductions) से जुड़ा है।
यह नया नोटिस पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए आए ₹7,100 करोड़ के टैक्स डिमांड के ऊपर है। इस तरह, लगातार दो फाइनेंशियल इयर्स में LIC पर कुल टैक्स और ब्याज का बकाया ₹17,431 करोड़ से अधिक हो गया है। हालांकि, LIC ने साफ किया है कि वह इन ऑर्डर्स के खिलाफ अपील करेगी और कंपनी के ऑपरेशनल इम्पैक्ट (operational impact) पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
टैक्स की चिंताओं से शेयर में गिरावट
इस बड़े टैक्स डिमांड की खबर के साथ ही LIC के शेयर पर भी दबाव देखने को मिला। शुक्रवार को बाजार बंद होने पर LIC का शेयर 1.98% की गिरावट के साथ ₹765.65 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 इंडेक्स में 2.09% की गिरावट दर्ज की गई। बार-बार इस तरह के बड़े टैक्स डिमांड आना और प्राइवेट कंपनियों की तुलना में धीमी ग्रोथ LIC के निवेशकों के भरोसे को परख रही है। पिछले एक साल में LIC का शेयर 4.43% गिरा है, और इस साल अब तक यह 10.44% टूट चुका है।
प्राइवेट कंपनियों से पिछड़ रही LIC
अगर वैल्यूएशन की बात करें तो LIC अपनी प्राइवेट सेक्टर की प्रतिद्वंद्वियों से काफी पीछे है। LIC का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 9.14-11.03 के बीच है, जबकि HDFC Life और SBI Life जैसे कॉम्पिटिटर्स का P/E रेश्यो 80-82x के स्तर पर है। यह दिखाता है कि निवेशक LIC को काफी कम वैल्यू दे रहे हैं। LIC की सालाना ग्रोथ रेट भी अपने कॉम्पिटिटर्स से कम है। प्राइवेट लाइफ इंश्योरर्स की प्रीमियम ग्रोथ पिछले फाइनेंशियल इयर्स में 21.7% CAGR रही है, जबकि LIC की ग्रोथ इसी अवधि में मात्र 9.8% CAGR रही है।
इंडस्ट्री में टैक्स का बढ़ता शिकंजा
LIC अकेला नहीं है जिसे इस तरह के टैक्स डिमांड का सामना करना पड़ रहा है। हाल के दिनों में Go Digit, ICICI Prudential Life और HDFC Life जैसी अन्य बीमा कंपनियों को भी टैक्स नोटिस मिले हैं। यह इंडस्ट्री में टैक्स अथॉरिटीज के बढ़ते फोकस को दर्शाता है। सेक्शन 80M के तहत ये टैक्स डिसअलाउंसेज (tax disallowances) इंटर-कॉर्पोरेट डिविडेंड (inter-corporate dividends) पर मिलने वाली छूट से जुड़े हैं, ताकि टैक्स की कैस्केडिंग इफेक्ट (cascading effect) को रोका जा सके।
फाइनेंशियल रेजिलिएंस पर सवाल
LIC का कहना है कि इन टैक्स डिमांड्स का कंपनी के ऑपरेशन्स पर कोई खास असर नहीं होगा, लेकिन बार-बार इतने बड़े अमाउंट के डिमांड्स आना उसकी फाइनेंशियल रेजिलिएंस (financial resilience) पर सवाल खड़े कर रहा है। दो साल में ₹17,431 करोड़ से ज्यादा की कुल देनदारी LIC के टैक्स कंप्लायंस प्रोसीजर (tax compliance procedures) पर सवाल उठाती है। हालांकि LIC के पास टैक्स डिमांड्स के खिलाफ अपील जीतने का ट्रैक रिकॉर्ड है, पर हाल की फ्रीक्वेंसी और स्केल इस ट्रैक रिकॉर्ड को टेस्ट कर सकते हैं। प्राइवेट प्लेयर्स के मुकाबले धीमी ग्रोथ और मार्केट शेयर खोना भी कंपनी के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है।
चुनौतियों के बावजूद आउटलुक
इन सब टैक्स और कॉम्पिटिशन की चुनौतियों के बावजूद, ज्यादातर एनालिस्ट्स LIC पर 'बाय' (Buy) रेटिंग दे रहे हैं और टारगेट प्राइस में अपसाइड की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, कुछ एनालिस्ट्स ने 'सेल' (Sell) रेटिंग भी दी है, जो कंपनी की फंडामेंटल और टेक्निकल आउटलुक को लेकर बढ़ती चिंताओं को दिखाती है। SEBI रेगुलेशन के अनुसार ट्रेडिंग विंडो बंद होने के बाद LIC के अपकमिंग Q4 FY26 रिजल्ट्स कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ और मैनेजमेंट की टैक्स डिस्प्यूट्स से निपटने की रणनीति को समझने में मदद करेंगे।