SEBI के नियम और LIC की चुनौती
बाजार नियामक SEBI की ओर से पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के सख्त नियम हैं। LIC, जो मई 2022 में लिस्ट हुई थी, फिलहाल 3.5% पब्लिक फ्लोट पर है। SEBI के अनुसार, कंपनी को मई 2027 तक यह बढ़ाकर कम से कम 10% करना होगा। सरकार, जिसके पास LIC की करीब 96.5% हिस्सेदारी है, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 6.5% और हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है।
बोनस शेयर कैसे करेगा मदद?
1:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करने से LIC के पब्लिक शेयरहोल्डिंग का आंकड़ा अपने आप दोगुना हो जाएगा। इससे शेयर की कीमत भी कम हो जाएगी, जो इसे ज्यादा निवेशकों के लिए आकर्षक बना सकता है। यह भविष्य में ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए सरकारी हिस्सेदारी बेचने में मददगार होगा। इस बोनस इश्यू के लिए कंपनी अपने विशाल रिजर्व (Reserves) में से लगभग ₹6,325 करोड़ का इस्तेमाल करेगी, जो दिसंबर 2025 तक ₹14.64 लाख करोड़ से अधिक थे। हालांकि, बोनस इश्यू से कंपनी का कुल मार्केट वैल्यू या आंतरिक मूल्य (Intrinsic Value) नहीं बदलता, केवल शेयरों की संख्या और प्रति शेयर कीमत में बदलाव आता है। सोमवार को LIC का शेयर ₹804.25 पर बंद हुआ, जो इसके IPO प्राइस ₹949 से काफी नीचे है।
कॉम्पिटिटर्स के मुकाबले LIC का वैल्यूएशन
भारतीय लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2026 से 2034 के बीच 8.35% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ने की उम्मीद है। बावजूद इसके, LIC का वैल्यूएशन (Valuation) अपने प्राइवेट कॉम्पिटिटर्स (Competitors) की तुलना में काफी कम है। अप्रैल 2026 तक, LIC का पिछले बारह महीनों का P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) रेशियो करीब 9.59 था। इसकी तुलना में, SBI लाइफ इंश्योरेंस का P/E लगभग 79.1, HDFC लाइफ इंश्योरेंस का 69.01, और ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस का 57.37 है। यह अंतर दर्शाता है कि LIC को एक वैल्यू इन्वेस्टमेंट माना जाता है, जबकि उसके प्रतिस्पर्धियों को ग्रोथ के लिए ज्यादा कीमत दी जा रही है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
LIC के सामने रेगुलेटरी लक्ष्यों को पूरा करने का दबाव है। सरकार 2027 तक पब्लिक ओनरशिप को 3.5% से बढ़ाकर 10% और अंततः 25% तक ले जाना चाहती है, जिसके लिए नियमित OFS की आवश्यकता होगी। बोनस इश्यू से शेयर की कीमत कम होती है, लेकिन यह कंपनी का वैल्यू नहीं बढ़ाता। LIC के शेयर लंबे समय से अपने IPO प्राइस ₹949 से नीचे कारोबार कर रहे हैं, जो निवेशकों की चिंताओं को दर्शाता है। मार्च 2023 में तो यह ₹530 के निचले स्तर पर भी चला गया था। भले ही LIC फर्स्ट-ईयर प्रीमियम (First-Year Premium) में 57.05% मार्केट शेयर के साथ बड़ी खिलाड़ी है, लेकिन प्राइवेट कंपनियां तेजी से बढ़ रही हैं। एनालिस्ट्स (Analysts) फिलहाल LIC पर 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं और ₹1,048.58 का एवरेज 12-महीने का टारगेट प्राइस (Target Price) बता रहे हैं। सरकार OFS के जरिए धीरे-धीरे हिस्सेदारी बेचेगी, जिससे रिटेल निवेशकों की भागीदारी बनी रहे।