Kotak Life CEO: टेक्नोलॉजी के बावजूद एजेंट बीमा की ग्रोथ के लिए ज़रूरी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Kotak Life CEO: टेक्नोलॉजी के बावजूद एजेंट बीमा की ग्रोथ के लिए ज़रूरी

कोटक लाइफ इंश्योरेंस के CEO महेश बालासुब्रमण्यम का कहना है कि जटिल, लॉन्ग-टर्म सेविंग्स वाले प्रोडक्ट्स बेचने के लिए इंसानी एजेंटों का होना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और AI एजेंटों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाएंगे, लेकिन ये पर्सनलाइज़्ड फाइनेंशियल एडवाइस का विकल्प नहीं बन सकते। कंपनी फिलहाल मार्केट शेयर और वैल्यू ऑफ न्यू बिज़नेस (VNB) जैसी प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस कर रही है।

एजेंटों का बढ़ता महत्व

कोटक लाइफ इंश्योरेंस के CEO महेश बालासुब्रमण्यम ने भारतीय बीमा सेक्टर में ह्यूमन-डिस्ट्रिब्यूशन मॉडल की अहमियत पर ज़ोर दिया है। उनका मानना है कि एजेंट, बैंकाश्योरेंस और डायरेक्ट चैनल इंडस्ट्री की रीढ़ बने हुए हैं, खासकर जब सेक्टर बड़े रेगुलेटरी बदलावों से गुज़र रहा है। CEO के अनुसार, भविष्य में ऐसे रिफॉर्म्स होने चाहिए जो इन डिस्ट्रिब्यूशन चैनलों को सपोर्ट करें और बीमा वितरकों की लॉन्ग-टर्म भागीदारी को बढ़ाएं।

मॉडर्न इंश्योरेंस में टेक्नोलॉजी की भूमिका

डिजिटल तरीकों को अपनाने में तेज़ी आई है, लेकिन बालासुब्रमण्यम ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और दूसरे टेक टूल्स इंसानी एजेंटों की जगह लेने के बजाय उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने वाले साबित होंगे। प्रोटेक्शन-बेस्ड आसान प्लान्स के लिए, ग्राहक ऑनलाइन सेल्फ-सर्विस ऑप्शन चुन सकते हैं। लेकिन, जटिल, लॉन्ग-टर्म सेविंग्स और गारंटीड रिटर्न वाले प्रोडक्ट्स के लिए इंसानी सलाह की ज़रूरत बनी रहेगी। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके प्रक्रियाओं को आसान बनाने का लक्ष्य सेल्स की क्वालिटी को बेहतर बनाना और गलत बिक्री (mis-selling) के मामलों को कम करना है, जिससे ग्राहकों का भरोसा और पॉलिसी की परसिस्टेंसी (polic y persistency) बढ़ सकती है।

सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी की रणनीति

कोटक लाइफ इंश्योरेंस प्रोटेक्शन प्लान्स और लॉन्ग-टर्म सेविंग्स स्कीम, दोनों तरह के प्रोडक्ट्स के संतुलित मिश्रण पर काम कर रहा है। यह तरीका कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस को बेहतर बनाने के लक्ष्य का अहम हिस्सा है। इन्वेस्टर्स अक्सर वैल्यू ऑफ न्यू बिज़नेस (VNB) जैसे मेट्रिक्स को ट्रैक करते हैं, जो नई पॉलिसियों की एक्सपेक्टेड प्रॉफिटेबिलिटी को मापता है, और एम्बेडेड वैल्यू (EV), जो फ्यूचर प्रॉफिट्स की प्रेजेंट वैल्यू को दर्शाता है। कंपनी इन मेट्रिक्स को सपोर्ट करने के लिए टेक्नोलॉजी और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क्स में लगातार निवेश कर रही है, ताकि ऐसे ग्रोथ हासिल की जा सके जो लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी से समझौता न करे।

रेगुलेटरी माहौल और इंडस्ट्री में बदलाव

पूरे बीमा सेक्टर पर टिप्पणी करते हुए, बालासुब्रमण्यम ने कहा कि लगातार रेगुलेटरी नीतियां कैपिटल प्लानिंग और बिजनेस एक्सपेंशन के लिए बहुत ज़रूरी हैं। उन्होंने कुछ प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स पर GST हटाने जैसे हालिया बदलावों का स्वागत किया, जिसे इंडस्ट्री ग्रोथ के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। 100% फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) की संभावना के बारे में, बीमा में ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटीज को देखते हुए, तुरंत कॉम्पोजिट लाइसेंस के ज़रिए रीस्ट्रक्चरिंग के बजाय डिस्ट्रिब्यूशन पार्टनरशिप को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया जा सकता है। शेयरधारकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि ये रेगुलेटरी बदलाव और टेक्नोलॉजी में निवेश, लगातार बढ़ते कॉम्पिटिशन वाले माहौल में सस्टेन्ड मार्जिन ग्रोथ और मार्केट शेयर में कैसे बदलता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.