भारतीय बीमा कंपनियां IRDAI के साथ बातचीत कर रही हैं ताकि वे अपने Equity Derivative एक्सपोजर को अलग-अलग फंडों के बजाय एक साथ जोड़ सकें। इससे बाजार के जोखिमों से निपटने में मदद मिलेगी।
भारतीय लाइफ और जनरल इंश्योरेंस कंपनियां इस समय IRDAI के साथ पोर्टफोलियो हेजिंग (Hedging) को लेकर चर्चा कर रही हैं। कंपनियों की मुख्य मांग यह है कि मौजूदा 'फंड-लेवल' पाबंदियों को खत्म करके उन्हें कुल एक्सपोजर को एक साथ मैनेज करने की इजाजत दी जाए, ताकि बड़े और मल्टी-प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का रिस्क बेहतर तरीके से मैनेज हो सके।
नियम और चुनौतियां
फरवरी 2025 में IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों को पहली बार Equity Derivatives का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। इसका उद्देश्य कंपनियों को बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव से बचाना था। हालांकि, कड़े नियमों के कारण अब तक इनका इस्तेमाल न के बराबर रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक केवल 1 लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने ही इनका इस्तेमाल किया है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी?
यह बदलाव HDFC Life, SBI Life, और ICICI Prudential Life जैसी लिस्टेड कंपनियों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है। भले ही अभी कोई बड़ा फाइनेंशियल बदलाव नहीं आया है, लेकिन अगर नियम आसान होते हैं, तो इन कंपनियों के बैलेंस शीट को बाजार की गिरावट से बचाना और आसान हो जाएगा।
रेगुलेटर का रुख
IRDAI का रुख अभी भी सतर्क है। रेगुलेटर इस बात पर ध्यान दे रहा है कि फ्लेक्सिबिलिटी देने के साथ-साथ काउंटरपार्टी रिस्क और लेवरेज (Leverage) जैसी समस्याओं को कैसे रोका जाए। किसी भी नए सर्कुलर या गाइडलाइन के आने तक, पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।
