Life Insurance Agents Federation of India (LIAFI) ने IRDAI से कमीशन स्ट्रक्चर में प्रस्तावित बदलावों पर फिर से विचार करने की मांग की है। यह मुद्दा लगभग **15 लाख** एजेंटों की रोजी-रोटी और लिस्टेड इंश्योरेंस कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है।
Life Insurance Agents Federation of India (LIAFI) ने औपचारिक रूप से Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) से कमीशन स्ट्रक्चर में प्रस्तावित बदलावों की समीक्षा करने की अपील की है। फेडरेशन का कहना है कि कमीशन में भारी कटौती ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में काम करने वाले एजेंटों की आजीविका पर सीधा प्रहार करेगी। यह विवाद तब सामने आया है जब सेक्टर सस्ता बीमा और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
लिस्टेड इंश्योरेंस कंपनियों पर क्या होगा असर?
LIC, HDFC Life, SBI Life और ICICI Prudential Life जैसी कंपनियों के लिए एजेंसी चैनल बिजनेस का मुख्य आधार है। डिजिटल क्रांति के बावजूद, आज भी भारत में नया बिजनेस प्रीमियम का एक बड़ा हिस्सा एजेंटों के जरिए आता है। यदि कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव के चलते एजेंटों में असंतोष बढ़ता है या वे काम छोड़ते हैं, तो इन कंपनियों के लिए अपनी सेल्स और ग्रोथ बरकरार रखना मुश्किल हो सकता है।
मार्जिन बनाम ग्रोथ का गणित
बीमा कंपनियों के लिए कमीशन कम होना एक फायदे की बात भी हो सकती है, क्योंकि इससे उनकी VNB (Value of New Business) मार्जिन में सुधार आ सकता है। हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि कम कमीशन एजेंटों को नए ग्राहक ढूंढने के लिए हतोत्साहित कर सकता है, जिससे कंपनी की ओवरऑल रेवेन्यू ग्रोथ धीमी पड़ सकती है। फिलहाल IRDAI '2047 तक सभी को बीमा' देने के लक्ष्य के साथ-साथ ग्राहकों के लिए पॉलिसी सस्ती करने की चुनौती से जूझ रहा है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को अब रेगुलेटर की अंतिम गाइडलाइंस पर नजर रखनी होगी। सबसे अहम यह होगा कि क्या IRDAI मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए कोई ट्रांजिशन पीरियड देता है। आने वाले समय में, निवेशकों को बीमा कंपनियों के क्वार्टरली नतीजों में NBP (New Business Premium) ग्रोथ और एजेंट एट्रिशन रेट पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
