सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर है कि भारत की पब्लिक सेक्टर जनरल इंश्योरेंस कंपनियों (PSUs) को अपनी डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करने का साफ निर्देश दिया गया है। इस कवायद का केंद्र बिंदु एक 'सुपर ऐप' का निर्माण है, जिसका इस्तेमाल पॉलिसी खरीदने, उसे रिन्यू कराने और क्लेम सेटल करने जैसे कामों के लिए किया जाएगा। इस पहल का सीधा मकसद सरकारी कंपनियों को प्राइवेट सेक्टर के उन बीमाकर्ताओं के साथ बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा करने में मदद करना है, जो टेक्नोलॉजी में काफी आगे हैं। यह कदम IRDAI द्वारा 2017 से चलाए जा रहे डिजिटल इंश्योरेंस को बढ़ावा देने के प्रयासों के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाना, क्लेम प्रक्रिया को आसान बनाना और डेटा मैनेजमेंट को सुरक्षित करना है। 2021 के एक निर्देश में इंश्योरेंस कंपनियों को पॉलिसी डॉक्यूमेंट स्टोर करने के लिए DigiLocker का इस्तेमाल करने का भी आदेश था।
यह 'सुपर ऐप' की जरूरत इसलिए पड़ रही है क्योंकि सरकारी कंपनियों का डिजिटल सेल्स में योगदान बहुत कम है। New India Assurance, National Insurance, United India Insurance और Oriental Insurance जैसी कंपनियों में यह सिर्फ 5-15% है। वहीं, ICICI Lombard और HDFC Ergo जैसे प्राइवेट प्लेयर्स 30-40% तक की डिजिटल सेल्स करते हैं। इस अंतर का असर मार्केट वैल्यूएशन पर भी दिखता है। Q1 FY26 में लगभग 15.5% मार्केट शेयर वाली New India Assurance का P/E रेश्यो 20.3-23.8 के आसपास है, जबकि टॉप प्राइवेट प्लेयर ICICI Lombard का P/E रेश्यो 29-37.75 की रेंज में है। यह दर्शाता है कि निवेशक प्राइवेट कंपनियों की टेक्नोलॉजिकल मजबूती पर ज्यादा भरोसा करते हैं। भले ही PSUs का कलेक्टिव मार्केट शेयर जनरल इंश्योरेंस मार्केट का लगभग 40% हो, लेकिन उनकी ग्रोथ रेट प्राइवेट कंपनियों के मुकाबले धीमी है।
हालांकि, यह 'सुपर ऐप' एक ऊपरी समाधान हो सकता है अगर अंदरूनी समस्याओं को ठीक न किया गया। PSUs पुरानी IT सिस्टम, सख्त कामकाज के तरीके और नए प्रोडक्ट्स लाने की बजाय सिर्फ कवरेज बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने जैसी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। इस वजह से वे टेक-सेवी प्राइवेट प्लेयर्स से मुकाबला नहीं कर पा रहे। Oriental Insurance और National Insurance जैसी कुछ कंपनियों ने FY24 में प्रॉफिट में वापसी की है, लेकिन उनकी सॉल्वेंसी रेशियो 1.50 के रेगुलेटरी स्टैंडर्ड से नीचे हैं। United India Insurance का कंबाइंड रेश्यो हाल के दिनों में 120-129% रहा है। पब्लिक मैंडेट के तहत किफायती दामों और व्यापक पहुंच पर उनका पारंपरिक जोर कभी-कभी प्रॉफिटेबिलिटी और रेस्पोंसिवनेस को प्रभावित करता है।
यह डिजिटल बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय इंश्योरेंस सेक्टर में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है। अनुमान है कि जनरल इंश्योरेंस FY26 में 8.7% बढ़ेगा, और कुल मार्केट 2026 तक $221.9 बिलियन तक पहुंच जाएगा। रेगुलेटरी सुधार, जैसे फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में बढ़ोतरी और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन पर जोर, सेक्टर को मजबूत कर रहे हैं। लेकिन, भारत में जनरल इंश्योरेंस की पैठ अभी भी GDP का सिर्फ 1% है, जो ग्लोबल एवरेज 4.2% से काफी कम है। IRDAI लगातार डिजिटल अपनाने को बढ़ावा दे रहा है। फाइनेंस मिनिस्टर ने क्लेम्स के लिए AI के इस्तेमाल, साइबर फ्रॉड जैसे नए जोखिमों के लिए प्रोडक्ट्स बनाने और अकाउंट एग्रीगेटर जैसे सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन की बात कही है, जो सेक्टर को मॉडर्न बनाने की सरकारी रणनीति को दिखाता है।
प्राइवेट इंश्योरर कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने और अंडरराइटिंग व क्लेम प्रोसेस को तेज करने के लिए टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। ICICI Lombard, HDFC ERGO और Tata AIG जैसी कंपनियों ने मजबूत डिजिटल मौजूदगी बनाई है और मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए लगातार इनोवेशन कर रहे हैं। भले ही New India Assurance जैसी PSU कंपनियों के पास बड़ा मार्केट शेयर हो, लेकिन प्राइवेट प्लेयर्स टेक्नोलॉजी-संचालित प्लेटफॉर्म का उपयोग करके रिटेल हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस जैसे तेजी से बढ़ते सेगमेंट में लगातार पैठ बना रहे हैं। हाल के मार्केट डेटा बताते हैं कि ICICI Lombard के शेयर में अच्छी तेजी दिखी है, जबकि PSU स्टॉक्स का प्रदर्शन आमतौर पर धीमा और स्थिर रहता है।
अनिवार्य 'सुपर ऐप' पहल एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका असली असर तब दिखेगा जब PSU इंश्योरर्स डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को अपनी बुनियादी ऑपरेशनल बदलावों के साथ जोड़ पाएंगे। भारतीय इंश्योरेंस मार्केट में ग्रोथ की उम्मीद बनी हुई है। पब्लिक सेक्टर जनरल इंश्योरर्स के लिए सफलता सिर्फ एक नया डिजिटल फ्रंट-एंड बनाने से कहीं ज्यादा होगी। इसके लिए उन्हें अपने कोर सिस्टम्स को अपडेट करना होगा, इनोवेशन की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा और लगातार प्रॉफिटेबिलिटी व अंडरराइटिंग परफॉरमेंस को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करने होंगे ताकि वे इस डिजिटल-फर्स्ट दौर में आगे बढ़ सकें।