भारत के अमीर वर्ग (High-Net-Worth Individuals - HNIs) के लिए बीमा का नजरिया पूरी तरह से बदल गया है। जहां पहले टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) को सिर्फ टैक्स बचाने का एक जरिया माना जाता था, वहीं अब यह उनकी संपत्ति (Wealth) को सुरक्षित रखने और बढ़ाने का एक मुख्य आधार बन गया है।
Policybazaar के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, पिछले 2 सालों में HNIs के बीच टर्म इंश्योरेंस का सेगमेंट 100% तक बढ़ गया है। यह ग्रोथ ओवरऑल टर्म इंश्योरेंस मार्केट की तुलना में काफी तेज है। पिछले 5 सालों में तो यह 200% से भी अधिक बढ़ चुका है। यह सिर्फ ज्यादा इंश्योरेंस कवर लेने की बात नहीं है, बल्कि अमीर भारतीय अब प्रोटेक्शन को अपनी लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग (Long-term Financial Planning) का एक अहम हिस्सा मान रहे हैं।
इस बढ़ती मांग के पीछे अमीर भारतीयों में फाइनेंशियल लिटरेसी (Financial Literacy) का बढ़ना साफ दिखता है। टर्म इंश्योरेंस, जिसे कभी सालाना टैक्स-सेविंग का एक हिस्सा समझा जाता था, अब कॉम्प्रिहेंसिव फाइनेंशियल प्लानिंग (Comprehensive Financial Planning) का शुरुआती और सबसे जरूरी कदम बन गया है। इसकी वजहें हैं - इनकम रिप्लेसमेंट की बढ़ती समझ, लाइफस्टाइल से जुड़े बड़े खर्चे और पीढ़ी-दर-पीढ़ी संपत्ति को सुरक्षित रखने की चाहत। HNIs के लिए एवरेज सम एश्योर्ड (Average Sum Assured) अब ₹2 करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि नॉन-HNIs के लिए यह ₹1 करोड़ है। इतना ही नहीं, 5% अमीर ग्राहक तो ₹5 करोड़ से भी ज्यादा का कवर ले रहे हैं। इस ट्रेंड को 30-39 साल के युवा सबसे ज्यादा बढ़ा रहे हैं, जो कुल खरीदारों का 57% हैं। इनमें 30-34 साल के युवा 30.2% हैं, और 35-39 साल वाले 26.8%। इसका मतलब है कि वे अपनी सबसे अच्छी कमाई के सालों (Peak Earning Years) में ही अपने फाइनेंशियल फ्यूचर को पूरी तरह सुरक्षित करना चाहते हैं। ₹3 करोड़ तक के कवर वाली पॉलिसियों में पिछले साल के मुकाबले 45% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब शादी, बच्चे के जन्म से कहीं ज्यादा बड़ा 'ट्रिगर' (Trigger) बन गई है।
अगर प्रोफेशनल्स की बात करें तो CXOs और सीनियर कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव्स 25-30% खरीद के साथ सबसे आगे हैं। इनके बाद डॉक्टर, वकील और अन्य स्पेशलिस्ट ( 20-25% ), बिजनेस ओनर्स ( 20-25% ) और स्टार्टअप फाउंडर्स व टेक एक्सपर्ट्स ( 15-20% ) आते हैं। इससे साफ है कि हाई-अर्निंग प्रोफेशनल्स के बीच इंश्योरेंस को एक जरूरी फाइनेंशियल टूल के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, भौगोलिक रूप से भी कुछ खास जगहों पर डिमांड ज्यादा है। बेंगलुरु, जो एक बड़ा टेक हब है, 16% डिमांड के साथ लिस्ट में सबसे ऊपर है। इसके बाद हैदराबाद ( 9% ), पुणे ( 7% ) और मुंबई ( 7% ) का नंबर आता है। साउथ इंडियन मार्केट्स से कुल मिलाकर करीब एक-चौथाई (Quarter) डिमांड आती है, जो नए जमाने की इनकम वाले इलाकों में प्रोटेक्शन की बढ़ती जरूरत को साफ दिखाता है।
यह बढ़ता हुआ HNI टर्म इंश्योरेंस सेगमेंट भारतीय इंश्योरेंस मार्केट के बड़े इकोसिस्टम का हिस्सा है, जो तेजी से विकसित हो रहा है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि आने वाले 3 से 5 सालों में यह सेक्टर 10%-12% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा। LIC, HDFC Life और ICICI Prudential Life जैसी कंपनियां इस मार्केट में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
हालांकि, इस बूम के साथ कुछ संभावित खतरे भी जुड़े हैं। अगर अर्थव्यवस्था में कोई मंदी आती है या लोगों की कमाई पर असर पड़ता है, तो ऊंचे प्रीमियम भरने में मुश्किल हो सकती है, जिससे पॉलिसी लैप्स (Policy Lapse) होने का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, कुछ खास टेक हब पर डिमांड का ज्यादा केंद्रित होना भी इसे लोकल इकोनॉमिक शॉक के प्रति संवेदनशील बनाता है। बावजूद इसके, एक्सपर्ट्स का मानना है कि टर्म इंश्योरेंस भारत के बढ़ते अमीर वर्ग के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग का एक मुख्य स्तंभ बना रहेगा, बशर्ते देश की इकोनॉमिक स्टेबिलिटी (Economic Stability) बनी रहे।