महिलाओं का फाइनेंशियल प्रोटेक्शन (Financial Protection) की ओर रुझान तेजी से बढ़ा है। उदाहरण के लिए, बंधन लाइफ (Bandhan Life) के आंकड़े बताते हैं कि पूर्वी भारत में महिला पॉलिसीहोल्डर्स की संख्या FY24 में 12% से बढ़कर FY26 तक 35% हो गई है। वहीं, युवा महिलाएं 70% से ज़्यादा टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) खरीद रही हैं, जिनकी उम्र 35 साल से कम है। पिछले दो सालों में महिलाओं द्वारा टर्म इंश्योरेंस की खरीद में 80% की बढ़ोतरी देखी गई है, और वे पहले से कहीं ज़्यादा बड़ा कवरेज अमाउंट चुन रही हैं।
यह सारी खरीदारी ऐसे समय में हो रही है जब भारत में मेडिकल इन्फ्लेशन सालाना 11.5% से 14% के बीच है। यह दर सामान्य महंगाई दर से कहीं ज़्यादा है, जिससे इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है और पॉलिसी के फायदों तथा असल खर्चों के बीच का अंतर चौड़ा होता जा रहा है। केयर हेल्थ इंश्योरेंस (Care Health Insurance) के आंकड़ों के अनुसार, FY25 और FY26 के बीच महिलाओं के क्लेम्स (Claims) में 37% का इजाफा हुआ है, जिसका मुख्य कारण 20-40 साल की महिलाओं द्वारा मैटरनिटी कॉस्ट्स (Maternity Costs) के लिए किया गया क्लेम है। सी-सेक्शन (C-section) की बढ़ती दरें, जो अब 27% से अधिक है, भी इन खर्चों को बढ़ा रही हैं।
एक बड़ी चिंता यह है कि ज़्यादातर महिलाएं आज भी काफी हद तक अंडर-इंश्योर्ड (Under-insured) हैं। टाडा एआईजी (TATA AIG) के एक सर्वे से पता चला है कि 75% से 80% महिलाओं के पास ₹20 लाख से कम का हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज है, जो कैंसर या दिल की बीमारियों जैसी बड़ी बीमारियों के लिए अक्सर काफी नहीं होता। 45 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं के लिए यह गैप और भी बड़ा है; इस आयु वर्ग की केवल लगभग 30% महिलाओं के पास ही हेल्थ इंश्योरेंस है, जो उम्र के साथ बढ़ती मेडिकल ज़रूरतों को देखते हुए उन्हें हाई रिस्क पर रखता है। कुछ साल पहले जो कवरेज पर्याप्त लगता था, वह आज बढ़ती मेडिकल खर्चों के कारण अपर्याप्त साबित हो रहा है। इसके अलावा, भारत के कुल हेल्थकेयर खर्च का लगभग 40% आज भी आउट-ऑफ-पॉकेट (Out-of-pocket) यानी सीधे अपनी जेब से देना पड़ रहा है, जो खासकर कम आय वाले परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है।
ओवरऑल भारतीय इंश्योरेंस मार्केट में धीरे-धीरे ग्रोथ की उम्मीद है, जिसमें हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर 2026 से 2030 तक सालाना लगभग 7.2% की दर से बढ़ सकता है। स्टार हेल्थ इंश्योरेंस (Star Health Insurance) में नए रिटेल पॉलिसीहोल्डर्स में 21% महिलाएं हैं, जो इस ग्रोथ में अपना योगदान दे रही हैं। इंश्योरेंस कंपनियां महिलाओं के लिए खास प्रोडक्ट विकसित कर रही हैं, जिनमें बेहतर मैटरनिटी और नवजात शिशु के लाभ (Newborn Benefits) और कम वेटिंग पीरियड (Waiting Periods) शामिल हैं। बंधन लाइफ भी बड़ी उम्र की महिलाओं के लिए वेल्थ-बिल्डिंग (Wealth-building) ऑप्शन पर फोकस कर रही है, जो खुद से इंश्योरेंस खरीदने में हुई बढ़ोतरी को दर्शाता है, यह उनकी बढ़ती फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस (Financial Independence) का संकेत है। इन चुनौतियों के बावजूद, इंश्योरेंस कंपनियों के लिए सबसे बड़ा काम यह सुनिश्चित करना होगा कि मार्केट ग्रोथ के साथ-साथ पॉलिसी का कवरेज भी बढ़ते हेल्थ खर्चों के अनुरूप रहे, ताकि पॉलिसीहोल्डर्स को अचानक आने वाले आर्थिक बोझ से बचाया जा सके।
