Non-Life Insurance: जून 2026 में प्रीमियम में **18%** की जोरदार उछाल, हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस की डिमांड बढ़ी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Non-Life Insurance: जून 2026 में प्रीमियम में **18%** की जोरदार उछाल, हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस की डिमांड बढ़ी

भारत के नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर ने जून 2026 में **18%** की जोरदार ग्रोथ दर्ज की है। इस उछाल की मुख्य वजह हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस की बढ़ी हुई डिमांड है। हालांकि, रिटेल सेगमेंट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद, फायर इंश्योरेंस जैसी कमर्शियल लाइन्स अभी भी प्राइसिंग प्रेशर से जूझ रही हैं।

Detailed Coverage

हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस की धूम

जून 2026 में, भारत के नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर ने पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 18% की सालाना वृद्धि के साथ ग्रॉस रिटन प्रीमियम (Gross Written Premium) में इजाफा देखा। यह आंकड़ा इस साल की शुरुआत में देखी गई धीमी ग्रोथ के बाद इंडस्ट्री के लिए एक अच्छी रिकवरी का संकेत देता है। इस ग्रोथ के पीछे हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस सेगमेंट्स का बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने रिटेल कंज्यूमर मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत की है।

हेल्थ इंश्योरेंस इस बार भी सबसे अव्वल रहा, जिसके कुल प्रीमियम में पिछले साल के मुकाबले 23% की बढ़ोतरी हुई। खास बात यह है कि इसमें भी रिटेल हेल्थ सेगमेंट (व्यक्तिगत और फैमिली पॉलिसी) ने 33% की छलांग लगाई। इससे पता चलता है कि भारतीय परिवारों में प्राइवेट हेल्थ कवरेज की जरूरत और मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी तरह, पैसेंजर व्हीकल और टू-व्हीलर की स्थिर बिक्री के चलते मोटर इंश्योरेंस कैटेगरी में 14% का विस्तार हुआ। चूंकि ये दोनों सेगमेंट जनरल इंश्योरेंस पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा हैं, इसलिए इनका प्रदर्शन इंडस्ट्री की ओवरऑल ग्रोथ पर गहरा असर डालता है।

कमर्शियल सेगमेंट्स पर प्राइसिंग का दबाव

जहां एक ओर रिटेल इंश्योरेंस की धूम है, वहीं दूसरी तरफ कमर्शियल लाइन्स में हालात थोड़े अलग हैं। कमर्शियल मार्केट में लगातार बने प्राइसिंग प्रेशर के कारण फायर इंश्योरेंस प्रीमियम में पिछले साल की तुलना में 23% की गिरावट दर्ज की गई। दरअसल, जब इंश्योरेंस कंपनियां कॉर्पोरेट क्लाइंट्स के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा करती हैं, तो वे बिजनेस जीतने के लिए अक्सर प्रीमियम कम कर देती हैं, जिससे इन कैटेगरी के कुल रेवेन्यू पर असर पड़ता है। मरीन हल इंश्योरेंस (Marine Hull Insurance) भी कमजोर बना रहा, जो दर्शाता है कि भले ही बिजनेस का रिटेल साइड बढ़ रहा हो, लेकिन कमर्शियल साइड अभी भी प्राइसिंग से जुड़ी चुनौतियों से निपट रहा है।

प्राइवेट कंपनियों की बढ़ती हिस्सेदारी

सेक्टर में ग्रोथ का फायदा सबको बराबर नहीं मिल रहा है। स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स (SAHIs) और प्राइवेट जनरल इंश्योरेंस कंपनियां पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) से मार्केट शेयर छीन रही हैं। SAHIs ने इस महीने 30% की ग्रोथ रिपोर्ट की, जबकि प्राइवेट जनरल इंश्योरर्स लगभग 15% बढ़े। इसके मुकाबले, पब्लिक सेक्टर इंश्योरर्स की ग्रोथ 13% के मामूली स्तर पर रही। यह बदलाव दिखाता है कि प्राइवेट और हेल्थ-फोक्स्ड इंश्योरर्स नए रिटेल ग्राहकों को आकर्षित करने में फिलहाल ज्यादा सफल हैं। नतीजतन, स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स का मार्केट शेयर जून में बढ़कर 15.9% हो गया, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 140 बेसिस पॉइंट्स ज्यादा है।

निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या रिटेल हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस की यह मजबूत रफ्तार कमर्शियल इंश्योरेंस लाइन्स के लगातार दबाव को झेल पाएगी। भविष्य का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि कमर्शियल प्राइसिंग स्थिर होती है या नहीं, या फिर प्रतिस्पर्धा के चलते इन सेगमेंट्स में और गिरावट आती है। आने वाली तिमाहियों में, निवेशक पब्लिक सेक्टर इंश्योरर्स की क्षमता पर भी नजर रखेंगे कि वे तेजी से बढ़ते स्टैंडअलोन हेल्थ और प्राइवेट इंश्योरेंस प्लेयर्स के मुकाबले कितनी प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.